रांची एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट: ‘आइसोलेशन वे’ बनेगा, सुरक्षा व्यवस्था को किया जाएगा और मजबूत | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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रांची एयरपोर्ट पर हाई अलर्ट: झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एयरपोर्ट पर संभावित आतंकी खतरों और आपात स्थितियों से निपटने के लिए अब ‘आइसोलेशन वे’ (Isolation Way/Isolation Bay) बनाने की योजना तैयार की गई है। यह कदम एयरपोर्ट को देश के अधिक सुरक्षित और आधुनिक हवाई अड्डों की श्रेणी में लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

क्या है ‘आइसोलेशन वे’?

‘आइसोलेशन वे’ एक विशेष सुरक्षित क्षेत्र होता है, जहां किसी संदिग्ध विमान को अलग रखा जाता है।

  • यदि विमान में बम की सूचना मिले
  • विमान हाईजैक की आशंका हो
  • किसी तकनीकी या सुरक्षा आपात स्थिति उत्पन्न हो

ऐसी परिस्थितियों में विमान को इस अलग स्थान पर ले जाकर जांच और कार्रवाई की जाती है। इससे यात्रियों, कर्मचारियों और एयरपोर्ट परिसर को सुरक्षित रखा जा सकता है।

303 एकड़ जमीन पर प्रस्ताव

रिपोर्ट के अनुसार, एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहित करीब 303 एकड़ जमीन पर इस ‘आइसोलेशन वे’ के निर्माण की योजना बनाई जा रही है।

यह जमीन एयरपोर्ट के विस्तार और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पहले ही अधिग्रहित की गई थी। अब इसी क्षेत्र का उपयोग सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

क्यों जरूरी हुआ यह कदम?

पिछले कुछ समय में रांची एयरपोर्ट को लेकर कई बार सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आई हैं।

  • एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी
  • संदिग्ध गतिविधियों की सूचना
  • सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट

इन घटनाओं ने एयरपोर्ट को “अति संवेदनशील” श्रेणी में ला दिया है, जिसके बाद सुरक्षा को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई।

अनधिकृत वाहनों से भी खतरा

सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया है कि एयरपोर्ट के आसपास बड़ी संख्या में अनधिकृत वाहन खड़े रहते हैं, जो सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।

  • प्रवेश और निकास मार्ग बाधित
  • वीवीआईपी मूवमेंट प्रभावित
  • किसी भी आपात स्थिति में खतरा बढ़ सकता है

इसको देखते हुए प्रशासन ने ऐसे वाहनों को हटाने और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

बढ़ाई जा रही सुरक्षा व्यवस्था

एयरपोर्ट की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है:

1. सीआईएसएफ की तैनाती मजबूत

एयरपोर्ट पर CISF (Central Industrial Security Force) की निगरानी और बढ़ाई गई है।

2. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर

हर संदिग्ध व्यक्ति और गतिविधि पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

3. कड़ी जांच प्रक्रिया

  • यात्रियों की जांच
  • सामान की स्कैनिंग
  • एयरपोर्ट परिसर में प्रवेश नियंत्रण

आपातकालीन प्रतिक्रिया की तैयारी

‘आइसोलेशन वे’ के निर्माण के साथ-साथ आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को भी मजबूत किया जा रहा है।

  • क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) की तैनाती
  • बम निरोधक दस्ता (Bomb Squad) की तैयारी
  • फायर और मेडिकल टीम अलर्ट

इससे किसी भी अप्रिय घटना से तुरंत निपटा जा सकेगा।

बढ़ते एयर ट्रैफिक के बीच सुरक्षा चुनौती

रांची एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

  • हर साल लाखों यात्री यात्रा करते हैं
  • देश के कई बड़े शहरों से कनेक्टिविटी
  • बढ़ते एयर ट्रैफिक के कारण सुरक्षा चुनौती भी बढ़ी

विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली बेहद जरूरी हो जाती है।

राष्ट्रीय स्तर के एयरपोर्ट की ओर कदम

‘आइसोलेशन वे’ का निर्माण रांची एयरपोर्ट को राष्ट्रीय स्तर के हाई-सिक्योरिटी एयरपोर्ट की श्रेणी में लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह सुविधा देश के बड़े एयरपोर्ट्स जैसे दिल्ली और मुंबई में पहले से मौजूद है।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया

इस योजना को लेकर स्थानीय लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

  • कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं
  • वहीं कुछ लोग जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्य को लेकर चिंता जता रहे हैं

हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

विशेषज्ञों की राय

एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि:

  • आधुनिक एयरपोर्ट के लिए ‘आइसोलेशन वे’ जरूरी
  • आतंकवाद और हाईजैक जैसी घटनाओं से निपटने में मदद
  • यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रभावी तरीका

भविष्य की योजनाएं

रांची एयरपोर्ट को और आधुनिक बनाने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं:

  • एयरपोर्ट विस्तार
  • नई सुविधाओं का विकास
  • बेहतर सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल

इन सभी योजनाओं का उद्देश्य एयरपोर्ट को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाना है।

निष्कर्ष

रांची एयरपोर्ट पर ‘आइसोलेशन वे’ बनाने की योजना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा और जरूरी कदम है।बढ़ते खतरों और आधुनिक चुनौतियों को देखते हुए यह पहल समय की मांग है। इससे न केवल एयरपोर्ट की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों का भरोसा भी बढ़ेगा।झारखंड के इस प्रमुख एयरपोर्ट को अब राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा व्यवस्था से लैस करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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