झारखंड के धनबाद रेलवे स्टेशन पर अवैध शराब तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच (सीआईबी) की संयुक्त टीम ने एक तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से 18 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन सतर्क’ के तहत की गई, जिसका उद्देश्य रेलवे परिसर में हो रहे अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना है।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि झारखंड से बिहार की ओर शराब तस्करी का नेटवर्क लगातार सक्रिय है और रेलवे इसका प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है।
कैसे पकड़ा गया तस्कर
जानकारी के अनुसार, आरपीएफ और सीआईबी की टीम शुक्रवार रात को धनबाद रेलवे स्टेशन पर गश्त कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर 2-3 के पास एक युवक संदिग्ध स्थिति में लाल रंग का ट्रॉली बैग लेकर घूमता दिखाई दिया। टीम को उसकी गतिविधियों पर संदेह हुआ और उसे रोककर पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान युवक घबरा गया और उसने बैग में शराब होने की बात स्वीकार कर ली। जब बैग की तलाशी ली गई तो उसमें कुल 18 लीटर अंग्रेजी शराब पाई गई। सभी बोतलों पर “For Sale in Jharkhand Only” अंकित था, जिससे साफ हो गया कि इसे अवैध रूप से दूसरे राज्य में ले जाया जा रहा था।
आरोपी की पहचान और मकसद
गिरफ्तार तस्कर की पहचान सोनू कुमार यादव के रूप में हुई है, जो धनबाद के बरमसिया धोवाटांड़ इलाके का निवासी बताया गया है। पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह अधिक पैसे कमाने के लालच में इस शराब को बिहार ले जा रहा था, जहां इसे ऊंचे दामों पर बेचकर मुनाफा कमाने की योजना थी।
बिहार में शराबबंदी लागू होने के कारण वहां शराब की मांग अधिक रहती है और इसी का फायदा उठाकर तस्कर झारखंड से शराब ले जाकर बेचते हैं।
जब्त शराब की कीमत
बरामद शराब की कुल मात्रा 18 लीटर बताई गई है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 19,680 रुपये आंकी गई है। यह शराब झारखंड में बिक्री के लिए अधिकृत थी, लेकिन इसे दूसरे राज्य में ले जाना कानूनन अपराध है।
ऑपरेशन सतर्क का महत्व
आरपीएफ द्वारा चलाया जा रहा “ऑपरेशन सतर्क” रेलवे परिसरों में अपराध और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान है। इसके तहत संदिग्ध व्यक्तियों की जांच, सामान की तलाशी और खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई की जाती है।
धनबाद रेलवे स्टेशन पर यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार शराब तस्करों को पकड़ा जा चुका है। जनवरी 2026 में भी इसी स्टेशन से 95 बोतल अवैध शराब के साथ दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया था।
क्यों बढ़ रही है शराब तस्करी
झारखंड और बिहार के बीच शराब तस्करी का एक बड़ा कारण बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी है। इस प्रतिबंध के कारण वहां शराब की मांग बनी रहती है, जिससे तस्करों को बड़ा मुनाफा मिलता है।
तस्कर अक्सर रेलवे, बस या निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस की नजर से बच सकें। कई मामलों में शराब को फल, कपड़े या अन्य सामान के रूप में छिपाकर ले जाया जाता है।
रेलवे बना तस्करी का आसान रास्ता
रेलवे नेटवर्क देश के सबसे बड़े परिवहन माध्यमों में से एक है और इसका दुरुपयोग अपराधी तत्व भी करते हैं। ट्रेन और स्टेशन की भीड़ का फायदा उठाकर तस्कर आसानी से अपनी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं।
धनबाद जैसे व्यस्त स्टेशन पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों को पहचानना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, आरपीएफ और अन्य एजेंसियां लगातार सतर्कता बरत रही हैं।
कानूनी कार्रवाई
इस मामले में आरपीएफ ने उत्पाद विभाग को लिखित शिकायत सौंप दी है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
प्रशासन की सख्ती और आगे की रणनीति
प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि रेलवे परिसर में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरपीएफ और स्थानीय पुलिस के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है, ताकि ऐसे मामलों पर तुरंत कार्रवाई हो सके।इसके साथ ही, खुफिया तंत्र को भी मजबूत किया जा रहा है ताकि तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
निष्कर्ष
धनबाद रेलवे स्टेशन पर हुई यह कार्रवाई न केवल एक तस्कर की गिरफ्तारी है, बल्कि यह एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती है जो राज्य की सीमाओं को पार कर अवैध कारोबार चला रहा है।
“ऑपरेशन सतर्क” जैसे अभियानों के जरिए रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन जब तक मांग बनी रहेगी, तब तक तस्करी के नए तरीके सामने आते रहेंगे।
इसलिए जरूरी है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ-साथ आम नागरिक भी सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।





