Homeब्रेकिंग न्यूज़राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे फिर स्वतंत्रता दिवस समारोह से रहे दूर,...

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे फिर स्वतंत्रता दिवस समारोह से रहे दूर, लगातार दूसरे साल नहीं पहुंचे लाल किला | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

- Advertisement -spot_img

राहुल गांधी स्वतंत्रता दिवस समारोह : देशभर में शनिवार, 15 अगस्त 2026 को 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। राजधानी दिल्ली में लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। इस ऐतिहासिक समारोह में केंद्र सरकार के मंत्री, सांसद, विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियां और आमंत्रित गणमान्य लोग मौजूद रहे। हालांकि, कांग्रेस के दो प्रमुख नेताओं राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।

राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं, जबकि मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष हैं। दोनों नेता लगातार दूसरे वर्ष लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिल रहा है।

लगातार दूसरे वर्ष दिखी दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी

15 अगस्त के राष्ट्रीय समारोह में विपक्ष के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी को संवैधानिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का लगातार दूसरे साल समारोह से दूर रहना चर्चा का विषय बना हुआ है।

पिछले वर्ष यानी 2025 में भी दोनों नेता लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं हुए थे। इस साल भी तस्वीर लगभग वैसी ही रही। रिपोर्टों के अनुसार, राहुल गांधी को इस वर्ष समारोह के लिए निमंत्रण मिला था और नेता प्रतिपक्ष के पद के अनुरूप उनकी बैठने की व्यवस्था किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद वह समारोह में नजर नहीं आए।

मल्लिकार्जुन खरगे भी कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए।

राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर क्यों उठ रहे सवाल?

राहुल गांधी की अनुपस्थिति इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। नेता प्रतिपक्ष को केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के बराबर दर्जा प्राप्त है। स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह देश के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल है।

ऐसे में राहुल गांधी का लगातार दूसरे साल कार्यक्रम से दूर रहना राजनीतिक विश्लेषकों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है। हालांकि, उनकी अनुपस्थिति के पीछे किसी एक कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार बताने से पहले कांग्रेस या स्वयं राहुल गांधी की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार करना जरूरी है।

2024 की सीटिंग व्यवस्था से जुड़ा विवाद

राहुल गांधी की स्वतंत्रता दिवस समारोह में मौजूदगी को लेकर चर्चा का एक महत्वपूर्ण संदर्भ वर्ष 2024 भी है। उस समय वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल हुए थे।

समारोह के दौरान राहुल गांधी की बैठने की जगह को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर बैठे नेता के लिए उचित प्रोटोकॉल और सम्मानजनक स्थान की मांग की थी।

वहीं, सरकारी पक्ष की ओर से बताया गया था कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में ओलंपिक पदक विजेताओं और अन्य विशिष्ट अतिथियों के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। इसी कारण बैठने की व्यवस्था में बदलाव हुआ था।

इसके बाद स्वतंत्रता दिवस समारोह में विपक्षी नेताओं की उपस्थिति और सीटिंग प्रोटोकॉल राजनीतिक बहस का विषय बन गया।

2026 में प्रोटोकॉल को लेकर क्या स्थिति रही?

2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले भी नेता प्रतिपक्ष की सीटिंग को लेकर चर्चा हुई। रिपोर्टों में बताया गया कि राहुल गांधी को आधिकारिक वरीयता क्रम के अनुसार स्थान दिए जाने की व्यवस्था थी।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक व्यवस्था और संसदीय लोकतंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। इसलिए स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोह में उनके लिए प्रोटोकॉल के अनुसार व्यवस्था किया जाना स्वाभाविक है।

इसके बावजूद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे दोनों कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इस वजह से एक बार फिर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच प्रोटोकॉल से जुड़े पुराने विवादों की चर्चा शुरू हो गई है।

कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ सकती है राजनीतिक बयानबाजी

राहुल गांधी और खरगे की अनुपस्थिति आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा बन सकती है। भाजपा की ओर से विपक्ष के नेताओं की गैरमौजूदगी पर सवाल उठाए जाने की संभावना है। वहीं कांग्रेस इसे अलग राजनीतिक और प्रोटोकॉल के संदर्भ में देख सकती है।

केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच कई मुद्दों पर पहले से ही मतभेद हैं। संसद में चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सरकारी नीतियों और विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आते रहे हैं।

ऐसे माहौल में राष्ट्रीय समारोह में विपक्ष के शीर्ष नेताओं की गैरमौजूदगी का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।

स्वतंत्रता दिवस समारोह का महत्व

भारत में स्वतंत्रता दिवस केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। यह देश की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, संविधान और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। 15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था। इसके बाद हर वर्ष देशभर में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है।

दिल्ली के लाल किले पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और देश को संबोधित करते हैं। इस दौरान सरकार की उपलब्धियों, भविष्य की योजनाओं और देश के सामने मौजूद चुनौतियों पर भी चर्चा होती है।

इस राष्ट्रीय मंच पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष की भूमिका भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

क्या राहुल गांधी और खरगे की गैरमौजूदगी राजनीतिक संदेश है?

यह सवाल फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। लगातार दूसरे साल दोनों नेताओं का समारोह में नहीं पहुंचना निश्चित रूप से राजनीतिक व्याख्या को जन्म देता है। लेकिन बिना आधिकारिक बयान के इसे किसी निश्चित राजनीतिक रणनीति या बहिष्कार का नाम देना जल्दबाजी होगी।

लोकतांत्रिक राजनीति में किसी नेता की मौजूदगी या गैरमौजूदगी के कई कारण हो सकते हैं। इसलिए आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही इस घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

निष्कर्ष

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का 15 अगस्त 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल नहीं होना राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। दोनों नेता लगातार दूसरे वर्ष लाल किले के मुख्य समारोह से दूर रहे हैं।

राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष होने और खरगे के राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष तथा कांग्रेस अध्यक्ष होने के कारण दोनों की गैरमौजूदगी को राजनीतिक और संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, 2024 में सामने आया सीटिंग विवाद भी इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में चर्चा का विषय बना हुआ है।

अब सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि कांग्रेस या दोनों नेताओं की ओर से इस वर्ष समारोह में शामिल नहीं होने को लेकर क्या आधिकारिक वजह सामने आती है। इसके साथ ही भाजपा और अन्य राजनीतिक दल इस मुद्दे पर किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर भी सबकी नजर रहेगी।

- Advertisement -spot_img
- Advertisement -spot_img
Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
- Advertisement -spot_img
Related News
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here