देवेंद्र नाथ महतो तिरंगा यात्रा : झारखंड की राजधानी रांची में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को लेकर एक बार फिर तनाव की स्थिति देखने को मिली। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए सदर अस्पताल से बाहर निकलने से पुलिस ने रोक दिया। इस घटनाक्रम के बाद अस्पताल परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई। तिरंगा यात्रा में शामिल होने की कोशिश के दौरान पुलिस और देवेंद्र नाथ महतो के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी।
देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से चल रहे JPSC-JSSC छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा हैं। परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन रांची में लगातार जारी है। इसी आंदोलन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
तिरंगा यात्रा में शामिल होना चाहते थे देवेंद्र नाथ महतो
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्र आंदोलनकारियों ने रांची में तिरंगा यात्रा निकालने की तैयारी की थी। देवेंद्र नाथ महतो भी इस यात्रा में शामिल होना चाहते थे। बताया गया कि वे सदर अस्पताल से निकलकर तिरंगा यात्रा में पहुंचना चाहते थे।
हालांकि, प्रशासन ने उन्हें अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी। पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया गया। इसके बाद अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
देवेंद्र नाथ महतो को रोकने के लिए अस्पताल के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। उनके समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी देखी गई।
स्वास्थ्य खराब होने के बाद अस्पताल में भर्ती हैं महतो
JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत खराब हो गई थी। आंदोलन और अनशन के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में उपचार के बावजूद उन्होंने आंदोलन से दूरी नहीं बनाई। स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा यात्रा में शामिल होने की उनकी इच्छा इसी का संकेत मानी जा रही है। हालांकि, अस्पताल से बाहर निकलने को लेकर पुलिस और प्रशासन ने अनुमति नहीं दी।
प्रशासन के सामने एक तरफ अस्पताल में भर्ती व्यक्ति की स्वास्थ्य सुरक्षा का सवाल था, तो दूसरी तरफ स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी थी।
JPSC-JSSC आंदोलन बना रांची का बड़ा मुद्दा
रांची में JPSC और JSSC से जुड़े छात्रों का आंदोलन लंबे समय से चर्चा में है। आंदोलनकारी छात्र परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार समेत कई मांगें उठा रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि सरकारी नियुक्ति परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाना जरूरी है।
इसी मुद्दे को लेकर रांची में प्रदर्शन, धरना और मार्च का सिलसिला जारी है। देवेंद्र नाथ महतो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और इसी कारण उनका नाम छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल है।
तिरंगा यात्रा से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा
15 अगस्त को रांची में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों को देखते हुए प्रशासन पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क था। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। ऐसे में छात्र आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों को लेकर भी प्रशासन अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।
देवेंद्र नाथ महतो को अस्पताल से बाहर जाने से रोकने का फैसला भी इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बताया जा रहा है। पुलिस की कोशिश थी कि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो और स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों।
हालांकि, आंदोलनकारियों की ओर से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा सकते हैं। उनका कहना है कि तिरंगा यात्रा जैसे शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से किसी को रोका जाना उचित नहीं है।
पहले भी हुआ था पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव
रांची में जारी JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान इससे पहले भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन चुकी है। विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की प्रतिक्रिया को लेकर काफी विवाद हुआ था।
उस घटनाक्रम के दौरान कई आंदोलनकारियों की तबीयत भी प्रभावित हुई थी। देवेंद्र नाथ महतो की स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद छात्र संगठनों ने सरकार और प्रशासन से आंदोलनकारियों के साथ संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग की थी।
ऐसे में स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा यात्रा को लेकर देवेंद्र नाथ महतो को रोके जाने की घटना ने पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत पर नजर
JPSC-JSSC आंदोलन के समाधान के लिए सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की कोशिशें भी हुई हैं। हालांकि, कई प्रमुख मांगों पर अब तक पूरी सहमति नहीं बन सकी है।
छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रणाली को लेकर उनकी शिकायतों का समाधान किया जाए और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दूसरी ओर सरकार की ओर से भर्ती और परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत से कोई स्थायी समाधान निकल पाएगा। तिरंगा यात्रा की घटना के बाद आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रांची में आगे क्या होगा?
देवेंद्र नाथ महतो को तिरंगा यात्रा में शामिल होने से रोकने की घटना के बाद छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर है। यदि आंदोलनकारी इस कार्रवाई के खिलाफ नए कार्यक्रम की घोषणा करते हैं, तो रांची में प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी पड़ सकती है।
वहीं, यदि सरकार छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का प्रभावी रास्ता निकालती है, तो आंदोलन को शांत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
निष्कर्ष
रांची में देवेंद्र नाथ महतो तिरंगा यात्रा विवाद ने स्वतंत्रता दिवस के दिन JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सदर अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो तिरंगा यात्रा में शामिल होना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अस्पताल से बाहर जाने से रोक दिया। इसके बाद पुलिस और उनके बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनने की खबर सामने आई।
यह मामला केवल एक तिरंगा यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड में चल रहे छात्र आंदोलन, परीक्षा व्यवस्था और सरकार-छात्र संवाद से भी जुड़ा है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत तथा प्रशासन की कार्रवाई यह तय करेगी कि रांची में JPSC-JSSC आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।







