रांची में सियासी तकरार तेज: बाबुलाल मरांडी के बयान पर कांग्रेस का पलटवार, राकेश सिन्हा ने गिनाईं 17 साल की “विफलताएं” | Jharkhand News | Bhaiyajii News

राकेश सिन्हा | Jharkhand News | Bhaiyajii News

रांची, 29 जनवरी 2026।
झारखंड की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली है। विपक्ष के नेता बाबुलाल मरांडी के हालिया “जनता के नाम संदेश” पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने कड़ा पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने न केवल बाबुलाल मरांडी के शासनकाल पर सवाल उठाए, बल्कि भाजपा शासित वर्षों को झारखंड की बर्बादी का दौर करार दिया। कांग्रेस के इस जवाब ने राज्य की सियासत में नई बहस छेड़ दी है।

राकेश सिन्हा ने अपने बयान में कहा कि बाबुलाल मरांडी ने अपने शासनकाल में जो नीतिगत और प्रशासनिक “बीज” बोए थे, उन्हें बाद के भाजपा मुख्यमंत्रियों ने संरक्षित कर वटवृक्ष का रूप दे दिया। उनका आरोप है कि इन्हीं नीतियों का नतीजा यह रहा कि झारखंड करीब 17 वर्षों तक अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और बदहाल व्यवस्था के कगार पर पहुंच गया। सिन्हा के अनुसार, राज्य की जनता आज भी उस दौर की कीमत चुका रही है।

कांग्रेस नेता ने तंज कसते हुए कहा कि जब कोई विपक्षी नेता एक अपराधी के एनकाउंटर पर सड़कों पर उतर आता है, तो इससे राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर गलत संदेश जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे माहौल में क्या राज्य के व्यापारी और निवेशक खुद को सुरक्षित महसूस कर पाएंगे? सिन्हा का कहना था कि भाजपा के शासन में न केवल आम जनता बल्कि कारोबारी वर्ग में भी असुरक्षा की भावना पनपी, जिसका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ा।

स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी राकेश सिन्हा ने तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बाबुलाल मरांडी के शासनकाल में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत इतनी खराब थी कि राज्य के बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन के अभाव में बच्चों की जान चली गई। यह आरोप झारखंड की उस समय की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सिन्हा ने कहा कि अगर उस दौर में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं मजबूत होतीं, तो कई मासूम जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।

शिक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस नेता ने एक भावनात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि उसी दौर में एक बच्ची “संतोषी भात-भात” कहते हुए भूख से मर गई। उनके अनुसार, यह घटना राज्य में सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण योजनाओं की विफलता का प्रतीक है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाबुलाल मरांडी के शासनकाल में करीब दो हजार स्कूल बंद कर दिए गए, जिससे खासकर आदिवासी और ग्रामीण बच्चों की शिक्षा पर गहरा असर पड़ा। सिन्हा ने सवाल किया कि उस समय आदिवासी बच्चों की पढ़ाई की चिंता क्यों नहीं की गई।

राकेश सिन्हा ने वर्तमान गठबंधन सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि आज झारखंड के आदिवासी बच्चे सरकारी सहायता से न केवल देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में, बल्कि विदेशों में भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की नीति का परिणाम है, जिसे कांग्रेस और गठबंधन सरकार ने प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में यह परिवर्तन झारखंड के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर भी कांग्रेस नेता ने विपक्ष पर पलटवार किया। बाबुलाल मरांडी द्वारा उठाए गए “जमीन छिनने के खतरे” के सवाल पर राकेश सिन्हा ने कहा कि अगर राज्य में अवैध घुसपैठ की समस्या है, तो इसके लिए जिम्मेदार वही लोग हैं जिन्होंने गृह मंत्रालय संभाला था। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध घुसपैठियों को रोकने में पूर्ववर्ती सरकारें विफल रहीं और अब उसी विफलता का ठीकरा वर्तमान सरकार पर फोड़ा जा रहा है। सिन्हा ने यहां तक कहा कि यदि विपक्ष सच में गंभीर है, तो उसे अपने ही कार्यकाल के गृह मंत्रियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि बाबुलाल मरांडी का जनता के नाम संदेश हताशा और राजनीतिक निराशा से भरा हुआ है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि बाबुलाल जी को अपने मन-मस्तिष्क का दबाव कम करना चाहिए और “कृष का गाना” सुनना चाहिए, ताकि वे सकारात्मक सोच के साथ राजनीति कर सकें। यह टिप्पणी भले ही तंज के रूप में की गई हो, लेकिन इससे दोनों दलों के बीच बयानबाज़ी की तल्खी साफ झलकती है।

राकेश सिन्हा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस जनता के सामने तथ्य रखना चाहती है और झारखंड के विकास की वास्तविक तस्वीर दिखाना चाहती है। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार सामाजिक न्याय, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में ठोस काम कर रही है, जबकि विपक्ष केवल बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप में उलझा हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता अब बीते 17 वर्षों के अनुभव के आधार पर सच्चाई समझ चुकी है और आने वाले समय में उसी के अनुरूप अपना फैसला करेगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाज़ी आगामी चुनावी माहौल की भूमिका तैयार कर रही है। एक ओर विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर कांग्रेस पिछले भाजपा शासनकाल की विफलताओं को जनता के सामने रखकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और भी गरमाने की संभावना है।

फिलहाल, राकेश सिन्हा के इस तीखे पलटवार ने बाबुलाल मरांडी के बयान पर राजनीतिक बहस को नई दिशा दे दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और यह सियासी जंग आगे किस मोड़ पर पहुंचती है।

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