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चाईबासा में रोजगार की मांग पर दुबिल माइंस के पास चक्का जाम, स्थानीय युवाओं का उग्र प्रदर्शन | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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चाईबासा दुबिल माइंस रोजगार आंदोलन : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर प्रखंड स्थित दुबिल माइंस क्षेत्र में शुक्रवार को स्थानीय युवाओं ने रोजगार की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में युवक-युवतियों और ग्रामीणों ने दुबिल माइंस के समीप मुख्य सड़क को जाम कर दिया और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता देने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में वर्षों से खनन कार्य संचालित हो रहा है, लेकिन इसका लाभ स्थानीय युवाओं को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां बाहरी लोगों को नौकरी दे रही हैं, जबकि खनन प्रभावित गांवों के शिक्षित और योग्य युवक बेरोजगार घूम रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों और युवाओं का आक्रोश सड़क पर दिखाई दिया।

स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की प्रमुख मांग

प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि दुबिल माइंस और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में भर्ती प्रक्रिया के दौरान स्थानीय लोगों की अनदेखी की जाती है। उन्होंने मांग की कि माइंस प्रबंधन और संबंधित कंपनियां पहले क्षेत्र के युवाओं को रोजगार दें और उसके बाद अन्य लोगों की नियुक्ति करें।

युवाओं ने कहा कि खनन परियोजनाओं के कारण सबसे अधिक प्रभावित स्थानीय गांव ही होते हैं। धूल, प्रदूषण, भारी वाहनों की आवाजाही और पर्यावरणीय प्रभाव का सामना भी ग्रामीणों को करना पड़ता है। ऐसे में रोजगार का पहला अधिकार भी स्थानीय लोगों का होना चाहिए।

कई गांवों के लोग आंदोलन में हुए शामिल

दुबिल माइंस के पास हुए इस आंदोलन में दुबिल, चिड़िया, अंकुवा, सोदा, टीमरा सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीण और युवा शामिल हुए। सुबह से ही लोग सड़क पर एकत्र होने लगे और हाथों में बैनर तथा तख्तियां लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

धरना स्थल पर महिलाओं की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली। ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

सड़क जाम से प्रभावित हुई आवाजाही

प्रदर्शन के कारण दुबिल माइंस से होकर गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। कई मालवाहक वाहन सड़क पर ही खड़े रहे, जबकि आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि आंदोलनकारियों ने आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को निकलने की अनुमति देने की बात कही।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं है, बल्कि सरकार और माइंस प्रबंधन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना है।

पहले भी उठ चुकी है रोजगार की मांग

यह पहला अवसर नहीं है जब स्थानीय लोगों ने रोजगार को लेकर आवाज उठाई हो। इससे पहले भी कई बार ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों और माइंस प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर स्थानीय युवाओं की नियुक्ति की मांग की थी। लेकिन अब तक उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।

ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता नहीं दी गई। यही कारण है कि उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ा।

प्रशासन और प्रबंधन से वार्ता की मांग

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि माइंस प्रबंधन, जिला प्रशासन और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच जल्द बैठक आयोजित कर समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि यदि वार्ता के माध्यम से सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो आंदोलन समाप्त किया जा सकता है।

युवाओं ने कहा कि उन्हें किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहिए, बल्कि उनका उद्देश्य रोजगार के अधिकार को सुनिश्चित करना है।

क्षेत्र के विकास में स्थानीय युवाओं की भागीदारी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी औद्योगिक परियोजना की सफलता तभी संभव है जब स्थानीय लोगों को उसका लाभ मिले। रोजगार मिलने से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और युवाओं का पलायन भी कम होता है।

दुबिल माइंस जैसे बड़े खनन क्षेत्र में यदि स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया जाता है तो इससे न केवल सामाजिक संतुलन मजबूत होगा बल्कि उद्योग और ग्रामीणों के बीच बेहतर संबंध भी स्थापित होंगे।

युवाओं ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी

धरना दे रहे युवाओं ने कहा कि यदि जल्द ही सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन, धरना और चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोजगार उनका अधिकार है और इसके लिए वे लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।

निष्कर्ष

चाईबासा के मनोहरपुर स्थित दुबिल माइंस में स्थानीय युवाओं का रोजगार आंदोलन अब एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक मुद्दा बन गया है। खनन प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार की मांग लंबे समय से उठती रही है, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन और माइंस प्रबंधन पर है कि वे स्थानीय युवाओं की मांगों को किस तरह संबोधित करते हैं। यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो क्षेत्र में शांति और विकास दोनों को नई दिशा मिल सकती है।

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