चतरा टीपीसी कमांडर गिरफ्तार : झारखंड के उग्रवाद प्रभावित चतरा जिले में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) के एक शीर्ष कमांडर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार उग्रवादी संगठन के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का करीबी सहयोगी माना जाता है। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी और वह कई आपराधिक तथा उग्रवादी गतिविधियों में शामिल रहा है। इस गिरफ्तारी को झारखंड में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि टीपीसी का सक्रिय कमांडर चतरा जिले के एक इलाके में अपने सहयोगियों से मिलने आने वाला है। सूचना मिलते ही जिला पुलिस, विशेष शाखा और सुरक्षा बलों ने संयुक्त अभियान चलाया। इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया गया और इसी दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखी गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। पुलिस ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
ब्रजेश गंझू का करीबी बताया जा रहा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार कमांडर टीपीसी सुप्रीमो ब्रजेश गंझू का विश्वसनीय सहयोगी था। संगठन के संचालन, लेवी वसूली, नए सदस्यों की भर्ती और उग्रवादी गतिविधियों के संचालन में उसकी अहम भूमिका रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी से पूछताछ के दौरान संगठन के अन्य सक्रिय सदस्यों, हथियारों के ठिकानों, वित्तीय नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
कई मामलों में थी पुलिस को तलाश
गिरफ्तार उग्रवादी पर हत्या, रंगदारी, लेवी वसूली, धमकी, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और विकास कार्यों में बाधा डालने जैसे कई गंभीर आरोप बताए जा रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह लंबे समय से फरार चल रहा था और विभिन्न जिलों में उसके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
सुरक्षा एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी को उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई मान रही हैं।
चतरा समेत कई जिलों में सक्रिय था नेटवर्क
टीपीसी की गतिविधियां मुख्य रूप से चतरा, लातेहार, पलामू और आसपास के उग्रवाद प्रभावित इलाकों में रही हैं। संगठन पर सड़क निर्माण, पुल निर्माण, खनन परियोजनाओं और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े ठेकेदारों से लेवी वसूलने के आरोप लगते रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में लगातार पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा बलों के अभियान के कारण संगठन की ताकत कमजोर हुई है, लेकिन उसके कुछ सक्रिय सदस्य अब भी जंगल क्षेत्रों में गतिविधियां संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पूछताछ में मिल सकती हैं बड़ी जानकारियां
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—
- संगठन के सक्रिय सदस्यों की संख्या
- हथियारों और गोला-बारूद के ठिकाने
- लेवी वसूली का नेटवर्क
- आर्थिक सहायता के स्रोत
- अन्य जिलों में सक्रिय सहयोगियों की जानकारी
यदि पूछताछ में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं तो आने वाले दिनों में कई अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
झारखंड में तेज हुआ नक्सल विरोधी अभियान
झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल पिछले कुछ वर्षों से उग्रवाद के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। कई बड़े उग्रवादियों के आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी के बाद राज्य में नक्सली गतिविधियों में कमी आई है।
सरकार विकास योजनाओं को तेज करने के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत कर रही है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य जीवन बहाल हो सके।
ग्रामीणों से सहयोग की अपील
पुलिस प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यदि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या उग्रवादी गतिविधि की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि स्थानीय लोगों के सहयोग से ही उग्रवाद पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
टीपीसी क्या है?
तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) झारखंड का एक प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन है। यह संगठन लंबे समय से चतरा, लातेहार, पलामू और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। संगठन पर लेवी वसूली, हथियारबंद गतिविधियां और विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियां लगातार इसके नेटवर्क को खत्म करने के लिए अभियान चला रही हैं। हाल के वर्षों में कई बड़े कमांडर गिरफ्तार हुए हैं या उन्होंने आत्मसमर्पण किया है।
क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाई गई
गिरफ्तारी के बाद चतरा और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस जंगल क्षेत्रों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है ताकि संगठन के अन्य सक्रिय सदस्यों को भी गिरफ्तार किया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि उग्रवाद के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
निष्कर्ष
चतरा में टीपीसी के शीर्ष कमांडर की गिरफ्तारी झारखंड पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। यदि पूछताछ में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आती हैं तो उग्रवादी संगठन के पूरे नेटवर्क पर बड़ा असर पड़ सकता है। सुरक्षा एजेंसियां अब संगठन के अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं। इस कार्रवाई से चतरा, पलामू और लातेहार सहित उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है।







