सीयूजे नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम : झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUJ) में युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के स्वयंसेवकों ने भाग लिया। इस दौरान युवाओं को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थियों द्वारा लिया गया नशामुक्ति संकल्प रहा। विद्यार्थियों ने नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों और समाज के अन्य लोगों को भी नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने की शपथ ली। आयोजन ने युवाओं के बीच नशामुक्त भारत के संदेश को मजबूत करने का काम किया।
नशामुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम नशामुक्त भारत अभियान और मिशन स्पंदन के तहत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे की समस्या के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें नशामुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
नशीले पदार्थों का सेवन केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका असर परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ता है। खासकर युवा अवस्था में नशे की शुरुआत भविष्य के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर सकती है। ऐसे में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को समझाया गया कि किसी भी प्रकार की नशीली आदत से बचने के लिए जागरूकता, आत्मनियंत्रण और सकारात्मक सोच जरूरी है।
युवाओं को दी गई नशे से दूर रहने की सीख
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं को नशे के विभिन्न रूपों और उसके दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि नशे की लत धीरे-धीरे व्यक्ति के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
नशे के कारण पढ़ाई में एकाग्रता कम होना, मानसिक तनाव बढ़ना, पारिवारिक विवाद और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। लंबे समय तक नशीले पदार्थों का सेवन व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है।
वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहने के साथ अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से नशामुक्ति अभियान को समाज के व्यापक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
ध्यान और राजयोग से सकारात्मक सोच का संदेश
जागरूकता कार्यक्रम में केवल नशे के नुकसान के बारे में जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए ध्यान और राजयोग का अभ्यास भी कराया गया।
ब्रह्माकुमारीज से जुड़े प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, आत्मनियंत्रण और मानसिक शांति के महत्व के बारे में बताया। उनका संदेश था कि युवा यदि अपनी ऊर्जा को शिक्षा, खेल, योग, ध्यान और रचनात्मक गतिविधियों में लगाएं तो वे नकारात्मक आदतों से खुद को दूर रख सकते हैं।
आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में विद्यार्थियों पर पढ़ाई, करियर और भविष्य को लेकर दबाव रहता है। ऐसे में मानसिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। ध्यान और सकारात्मक सोच युवाओं को तनाव से निपटने और बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
विद्यार्थियों ने ली नशामुक्ति की शपथ
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से नशामुक्ति की शपथ ली। इस शपथ में नशीले पदार्थों से दूर रहने और दूसरों को भी नशे के खिलाफ जागरूक करने का संकल्प शामिल रहा।
विद्यार्थियों का यह संकल्प कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। नशामुक्ति की शपथ का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत स्तर पर नशे से बचने तक सीमित नहीं था, बल्कि युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास कराना भी था।
एक विद्यार्थी जब नशे के खिलाफ जागरूक होता है तो वह अपने परिवार और दोस्तों तक भी यह संदेश पहुंचा सकता है। इस तरह जागरूकता की छोटी पहल धीरे-धीरे व्यापक सामाजिक अभियान का रूप ले सकती है।
NSS स्वयंसेवकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन में राष्ट्रीय सेवा योजना यानी NSS की महत्वपूर्ण भूमिका रही। NSS का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भावना को विकसित करना भी है। नशामुक्ति जैसे सामाजिक विषयों पर कार्यक्रम आयोजित करके विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं से जोड़ने का प्रयास किया गया।
NSS स्वयंसेवकों ने कार्यक्रम की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को केवल अकादमिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और जिम्मेदारी का भी अनुभव प्रदान करते हैं।
विश्वविद्यालय परिसर से शुरू होने वाली जागरूकता मुहिम समाज के अन्य हिस्सों तक भी पहुंच सकती है। यही कारण है कि शैक्षणिक संस्थानों में नशा विरोधी कार्यक्रमों को लगातार बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
ब्रह्माकुमारीज के प्रतिनिधियों ने किया मार्गदर्शन
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारीज की ओर से बीके सीमा बहन, बीके भारती बहन, बीके तनुजा बहन, बीके रामनिवास भाई और बीके दुखरन भाई सहित अन्य प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
उन्होंने नशे से दूर रहने के लिए सकारात्मक सोच और आत्मअनुशासन को महत्वपूर्ण बताया। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ शरीर और शांत मन ही बेहतर भविष्य की आधारशिला हैं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने ध्यान और राजयोग से जुड़ी गतिविधियों में भी हिस्सा लिया। इससे उन्हें मानसिक शांति और आत्मनियंत्रण के महत्व को समझने का अवसर मिला।
नशामुक्त समाज के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
नशे की समस्या का समाधान केवल कानून या सरकारी अभियानों से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, सामाजिक संगठन और युवा सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
माता-पिता को बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं शैक्षणिक संस्थानों को नियमित रूप से नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए। युवाओं को खेल, शिक्षा, कला, तकनीक और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना भी इस दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
रांची और पूरे झारखंड में युवाओं के बीच नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतरता जरूरी है। विश्वविद्यालय परिसर से शुरू हुई जागरूकता समाज के लिए सकारात्मक बदलाव का आधार बन सकती है।
CUJ कार्यक्रम ने दिया मजबूत सामाजिक संदेश
झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित नशा विरोधी जागरूकता कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को नशे के नुकसान के प्रति जागरूक करने के साथ स्वस्थ और जिम्मेदार जीवन का संदेश दिया। कार्यक्रम में जागरूकता, ध्यान, राजयोग और सामूहिक शपथ के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
नशामुक्त भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब युवा खुद नशे से दूर रहने के साथ दूसरों को भी इसके खिलाफ जागरूक करें। सीयूजे के विद्यार्थियों द्वारा लिया गया संकल्प इसी सामूहिक जिम्मेदारी की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।







