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JPSC-JSSC छात्र आंदोलन: अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ी, ग्लूकोज 53 तक गिरा | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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JPSC-JSSC छात्र आंदोलन : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी आंदोलन के बीच अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। रविवार सुबह डॉक्टरों की जांच में उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल 53 दर्ज किया गया।

छात्र नेता की तबीयत बिगड़ने के बीच सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का एक और दौर भी शुरू हुआ। ऐसे में अब आंदोलन के समाधान को लेकर सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है।

16वें दिन भी जारी रहा JPSC-JSSC आंदोलन

JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन रांची में लगातार जारी है। रविवार को यह आंदोलन 16वें दिन में प्रवेश कर गया। छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सहित कई मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

छात्रों की ओर से सरकार के साथ पहले भी कई दौर की बातचीत की गई, लेकिन सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। इसी गतिरोध के बीच सरकार ने रविवार को छात्रों के साथ फिर से बातचीत करने का फैसला किया।

भूख हड़ताल पर हैं देवेंद्र नाथ महतो

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो पिछले करीब एक सप्ताह से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। रिपोर्टों के मुताबिक रविवार तड़के उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ गई। डॉक्टरों ने जांच के दौरान उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल 53 पाया, जिसके बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई।

अनशन के दौरान लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत प्रभावित हुई है। इससे पहले भी आंदोलन स्थल पर डॉक्टरों की टीम उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी।

एक रिपोर्ट के अनुसार, उनकी स्थिति बिगड़ने पर उन्हें सलाइन ड्रिप भी दी गई। इसके बावजूद आंदोलन को लेकर छात्रों का रुख अभी भी स्पष्ट है कि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

सरकार और छात्रों के बीच फिर बातचीत

देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बीच सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच रविवार को बातचीत का नया दौर शुरू हुआ। इससे पहले शुक्रवार और शनिवार को भी सरकार के प्रतिनिधियों तथा छात्र संगठनों के बीच बैठकें हुई थीं, लेकिन गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका था।

सरकार की कोशिश है कि छात्रों की मांगों पर बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाए और लंबे समय से चल रहे आंदोलन को समाप्त कराया जा सके।

वहीं छात्र प्रतिनिधियों की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि केवल मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं होगा। वे अपनी मांगों पर ठोस और लिखित कार्रवाई चाहते हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान छात्र भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता शामिल है।

इसके अलावा आंदोलनकारी छात्र CBI जांच की मांग भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का भविष्य परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता से सीधे जुड़ा है। इसलिए भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायत होने पर उसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर भी नजर

JPSC-JSSC आंदोलन के बीच छात्रों की ओर से 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया गया है। ऐसे में रविवार की बातचीत के परिणाम पर छात्रों के अगले कदम काफी हद तक निर्भर कर सकते हैं।

यदि बातचीत से कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो विधानसभा घेराव का कार्यक्रम आगे बढ़ सकता है। इसको देखते हुए रांची में प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क है।

सरकार और छात्रों के बीच रविवार की बातचीत को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आंदोलन अब लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और छात्र नेता की स्वास्थ्य स्थिति भी चिंता का विषय बन गई है।

लिखित आश्वासन की मांग

आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि अब सिर्फ बातचीत या मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। छात्रों की मांग है कि सरकार उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन दे और कार्रवाई की स्पष्ट समयसीमा बताए।

छात्र प्रतिनिधियों के मुताबिक जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया गया है।

यही वजह है कि सरकार की ओर से बातचीत की कोशिशों के बावजूद आंदोलन तत्काल समाप्त होता नजर नहीं आ रहा है।

स्वास्थ्य बिगड़ने से बढ़ी चिंता

देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने की खबर के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद छात्रों और समर्थकों में चिंता बढ़ गई है। लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका को लेकर डॉक्टरों द्वारा निगरानी की जा रही है।

ब्लड ग्लूकोज का 53 तक पहुंचना सामान्य स्तर से काफी कम है। ऐसे में लंबे समय तक भोजन नहीं लेने वाले व्यक्ति की चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है।

आंदोलनकारी छात्रों के लिए अब परीक्षा विवाद के साथ-साथ अपने नेता के स्वास्थ्य की चिंता भी एक बड़ा मुद्दा बन गई है।

सरकार के सामने दोहरी चुनौती

JPSC-JSSC विवाद में सरकार के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती छात्रों की मांगों पर सहमति बनाकर आंदोलन को समाप्त कराना है। दूसरी चुनौती अनशन पर बैठे छात्र नेता की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी है।

सरकार पहले ही छात्रों के साथ कई दौर की बातचीत कर चुकी है। लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के कारण आंदोलन जारी है।

अब रविवार की वार्ता में क्या निर्णय होता है और क्या सरकार छात्रों की प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन देती है, इस पर सभी की नजर है।

छात्रों का आंदोलन क्यों महत्वपूर्ण है?

झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाएं सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। परीक्षा में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता की खबर अभ्यर्थियों के बीच चिंता पैदा करती है।

छात्रों का कहना है कि वे वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ता है।

इसी कारण छात्र भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है। देवेंद्र नाथ महतो की स्वास्थ्य स्थिति और छात्रों की मांगों को देखते हुए आने वाले कुछ घंटे आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

यदि सरकार और छात्रों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति बनती है तो आंदोलन खत्म करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। लेकिन यदि CBI जांच और अन्य प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध कायम रहता है तो 10 अगस्त के विधानसभा घेराव की ओर आंदोलन आगे बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ना अब आंदोलन का सबसे गंभीर पहलू बन गया है। अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल 53 दर्ज किया गया, जिसके बाद डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी की।

इधर सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का नया दौर शुरू हो चुका है। सरकार जहां बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र अपनी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन की मांग कर रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और छात्रों के बीच बातचीत से JPSC-JSSC विवाद का समाधान निकल पाएगा या 10 अगस्त का विधानसभा घेराव होगा? आने वाले अपडेट इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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