मोहरीबांध धंसी सड़क : झारखंड के धनबाद जिले के झरिया-बलियापुर मुख्य मार्ग पर स्थित मोहरीबांध में सड़क धंसने की घटना के बाद सड़क निर्माण विभाग (RCD) की तकनीकी टीम ने मौके का निरीक्षण किया। इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सड़क की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और संभावित कारणों का आकलन किया।
यह सड़क झरिया, बलियापुर और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क का धंसना आम लोगों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन गया है।
RCD की तकनीकी टीम ने किया निरीक्षण
रांची से पहुंची सड़क निर्माण विभाग की विशेषज्ञ टीम ने सड़क के धंसे हिस्से का तकनीकी निरीक्षण किया। टीम ने सड़क की सतह, आसपास की मिट्टी, भू-धंसान की स्थिति और भूमिगत परिस्थितियों का अध्ययन किया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने बताया कि विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और मरम्मत कार्य की योजना बनाई जाएगी।
भू-धंसान और भूमिगत आग सबसे बड़ी वजह
धनबाद का झरिया क्षेत्र लंबे समय से भूमिगत कोयला आग और भू-धंसान की समस्या से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भूमिगत आग के कारण जमीन अंदर से कमजोर होती जाती है, जिससे समय-समय पर सड़कें और भवन धंसने लगते हैं।
मोहरीबांध की सड़क भी इसी भू-वैज्ञानिक समस्या से प्रभावित बताई जा रही है। सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर होने के कारण अचानक धंसाव की स्थिति बनी।
44 करोड़ रुपये की सड़क पर उठे सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि यह क्षेत्र पहले से भू-धंसान प्रभावित था तो निर्माण से पहले विस्तृत भू-वैज्ञानिक सर्वे क्यों नहीं कराया गया।
करीब 44 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस सड़क का कुछ ही समय में धंस जाना निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। लोगों ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
BCCL की भूमिका भी चर्चा में
जानकारों का मानना है कि भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की भूमिगत खनन गतिविधियों का भी सड़क की स्थिति पर प्रभाव पड़ सकता है। लगातार खनन, भूमिगत आग और कुछ क्षेत्रों में ब्लास्टिंग के कारण जमीन की स्थिरता प्रभावित होती है।
RCD अधिकारियों ने बताया कि सड़क की स्थायी मरम्मत के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग को लेकर संबंधित एजेंसियों से समन्वय किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों में डर का माहौल
सड़क धंसने के बाद आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय वाहन चालकों का कहना है कि रात के समय सड़क पर सफर करना बेहद जोखिम भरा हो गया है। कई जगह दरारें दिखाई दे रही हैं, जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ गई है।
यातायात पर पड़ा असर
सड़क धंसने के कारण कई वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से गुजरना पड़ रहा है। इससे यात्रियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है और परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हुई है।
व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है क्योंकि यह मार्ग कोयला परिवहन सहित स्थानीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
विशेषज्ञों की राय
भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि झरिया जैसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण से पहले विस्तृत जियोटेक्निकल जांच और भूमिगत सर्वे अनिवार्य होना चाहिए। यदि निर्माण से पहले जमीन की वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया जाए तो भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि केवल सड़क की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि भूमिगत आग और भू-धंसान की समस्या का स्थायी समाधान भी जरूरी है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ इस महत्वपूर्ण सड़क को जल्द से जल्द चालू करना है। RCD की रिपोर्ट आने के बाद सड़क की मरम्मत, मजबूतीकरण और भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।
यदि समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आगामी मानसून में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
निष्कर्ष
मोहरीबांध में सड़क धंसने की घटना एक सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि झरिया क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही भू-धंसान और भूमिगत आग की समस्या का गंभीर संकेत है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़क का धंसना निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी योजना और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाता है। अब लोगों की नजर RCD की रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बड़े खतरे का कारण बन सकती हैं।







