धनबाद नकली नमक फैक्ट्री : झारखंड के धनबाद जिले में नकली खाद्य उत्पादों के अवैध कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है। धनसार थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसी अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जहां कथित तौर पर टाटा नमक और पतंजलि नमक जैसे नामी ब्रांडों के नाम पर नकली नमक तैयार कर उसकी पैकिंग की जा रही थी। छापेमारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में डुप्लीकेट पैकिंग सामग्री, तैयार पैकेट और नकली नमक बरामद किया है। इस मामले में फैक्ट्री संचालक शुभम अग्रवाल और उसके पिता को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह मामला उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और ब्रांड की साख का दुरुपयोग कर अवैध कारोबार चलाने से जुड़ा माना जा रहा है।
गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार धनसार थाना क्षेत्र के गुरु नानक कॉलेज के समीप भूदा मुख्य मार्ग पर यह फैक्ट्री संचालित की जा रही थी। टाटा कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि को नकली उत्पाद तैयार किए जाने की सूचना मिली, जिसके बाद इसकी जानकारी धनसार थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर छापेमारी की।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि परिसर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम से मिलते-जुलते पैकेटों में नमक की पैकिंग की जा रही थी। पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री, तैयार नकली नमक और अन्य उपकरण जब्त कर लिए।
दो आरोपी गिरफ्तार
छापेमारी के दौरान पुलिस ने फैक्ट्री संचालक शुभम अग्रवाल और उसके पिता को मौके से गिरफ्तार कर लिया। दोनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि यह कारोबार कब से चल रहा था, इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा नकली नमक की सप्लाई किन-किन जिलों और राज्यों में की जा रही थी।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दायरे में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को भी शामिल किया जाएगा। यदि अन्य स्थानों पर भी ऐसे गोदाम या यूनिट मिले तो वहां भी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़
विशेषज्ञों का मानना है कि बिना गुणवत्ता जांच के तैयार किए गए खाद्य उत्पाद लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। यदि नकली नमक में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया हो तो इससे स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसी कारण खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली ब्रांडिंग को गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है।
ब्रांड नाम का किया जा रहा था दुरुपयोग
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित नामी कंपनियों के ब्रांड नाम का इस्तेमाल कर नकली उत्पाद बाजार में उतार रहे थे। इससे न केवल उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी होती है, बल्कि संबंधित कंपनियों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचता है।
पुलिस जब्त पैकिंग सामग्री की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैकेट कहां से छपवाए गए थे और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है।
किन क्षेत्रों में होती थी सप्लाई?
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली नमक की सप्लाई धनबाद के अलावा झारखंड के अन्य जिलों या पड़ोसी राज्यों तक भी की जा रही थी या नहीं। पुलिस विभिन्न व्यापारियों और वितरकों से भी पूछताछ कर सकती है।
यदि सप्लाई नेटवर्क बड़ा निकला तो इस मामले में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।
उपभोक्ताओं के लिए सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को हमेशा अधिकृत दुकानों से ही खाद्य उत्पाद खरीदने चाहिए। खरीदारी करते समय पैकेजिंग, एमआरपी, निर्माण तिथि, बैच नंबर, एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और सील की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद की कीमत असामान्य रूप से कम हो या पैकेट की गुणवत्ता संदिग्ध लगे तो उसकी सूचना संबंधित विभाग को देनी चाहिए।
पुलिस जांच जारी
पुलिस ने जब्त सामग्री को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया है। मामले में विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
धनबाद में नकली नमक फैक्ट्री का खुलासा खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है। इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि नकली ब्रांड के नाम पर लोगों के स्वास्थ्य और भरोसे के साथ खिलवाड़ करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। पुलिस की जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और सप्लाई चैन का भी खुलासा होने की उम्मीद है। आम नागरिकों को भी सतर्क रहकर केवल प्रमाणित और विश्वसनीय विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदनी चाहिए।







