दुबई में झारखंड के प्रवासी मजदूर की मौत : झारखंड के गिरिडीह जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बेहतर रोजगार और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के दुबई गए प्रवासी मजदूर लालचंद महतो का वहीं निधन हो गया। बताया जा रहा है कि नौकरी छूटने, पासपोर्ट और वीजा खो जाने तथा लंबे समय तक आर्थिक तंगी से जूझने के कारण उनकी स्थिति लगातार खराब होती गई। आखिरकार दुबई में ही उनकी मौत हो गई, जिससे परिवार गहरे सदमे में है।
यह घटना विदेशों में रोजगार की तलाश में जाने वाले भारतीय और विशेष रूप से झारखंड के प्रवासी मजदूरों के सामने आने वाली चुनौतियों को एक बार फिर उजागर करती है।
कौन थे लालचंद महतो?
लालचंद महतो झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के निवासी थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से वे वर्ष 2026 की शुरुआत में दुबई गए थे। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में नौकरी मिलने से घर की आर्थिक परेशानियां दूर होंगी, लेकिन परिस्थितियां इसके बिल्कुल विपरीत हो गईं।
शुरुआती कुछ समय तक उन्हें काम मिला, लेकिन बाद में नौकरी चली गई। नौकरी जाने के बाद उनके सामने रहने और खाने तक की समस्या खड़ी हो गई।
नौकरी छूटने के बाद बढ़ी मुश्किलें
जानकारी के अनुसार, नौकरी समाप्त होने के बाद लालचंद महतो का पासपोर्ट और वीजा भी गुम हो गया। आवश्यक दस्तावेज नहीं होने के कारण वे भारत वापस नहीं लौट सके। लगातार बढ़ती आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव ने उनकी स्थिति को और गंभीर बना दिया।
ऐसे समय में दुबई में रह रहे कुछ झारखंडी प्रवासी मजदूरों ने उनकी मदद की। उन्होंने भोजन और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई तथा भारत वापस भेजने की कोशिश भी शुरू की। हालांकि, सभी प्रयासों के बीच उनके निधन की खबर आ गई।
परिवार पर पहले से था आर्थिक संकट
लालचंद महतो का परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहा था। बताया जाता है कि उनके पिता कई वर्षों से लापता हैं। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी लालचंद पर ही थी।
अब उनकी मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट और भी गहरा गया है। परिजनों का कहना है कि घर चलाने वाला मुख्य सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहा। परिवार ने सरकार से मदद की अपील की है।
सरकार से क्या मांग कर रहा है परिवार?
परिजनों ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मांग की है कि लालचंद महतो का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाए ताकि उनका अंतिम संस्कार अपने गांव में किया जा सके।
इसके अलावा परिवार ने आर्थिक सहायता देने और विदेशों में फंसे प्रवासी मजदूरों के लिए बेहतर सहायता तंत्र विकसित करने की भी मांग की है।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि विदेशों में काम करने वाले हजारों भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है।
कई बार मजदूर एजेंटों के माध्यम से विदेश पहुंचते हैं, जहां उन्हें अनुबंध के अनुरूप काम नहीं मिलता। नौकरी छूटने, वेतन नहीं मिलने, दस्तावेज जब्त होने या खो जाने जैसी समस्याओं के कारण वे कानूनी और आर्थिक संकट में फंस जाते हैं।
ऐसी परिस्थितियों में भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियों की त्वरित सहायता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
झारखंड के कई प्रवासी अब भी संकट में
सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार विदेशों में अभी भी झारखंड के कई श्रमिक विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। कुछ मजदूरों के पार्थिव शरीर अब तक भारत नहीं लाए जा सके हैं, जबकि कुछ लोग कानूनी मामलों में फंसे हुए हैं।
ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि विदेश जाने वाले श्रमिकों के लिए पूर्व तैयारी, दस्तावेजों की सुरक्षा और सरकारी सहायता व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
विदेश जाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में नौकरी के लिए जाने वाले लोगों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए—
- केवल अधिकृत और पंजीकृत भर्ती एजेंसियों के माध्यम से विदेश जाएं।
- पासपोर्ट, वीजा और अन्य जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल और प्रिंट कॉपी सुरक्षित रखें।
- भारतीय दूतावास और हेल्पलाइन नंबर अपने पास रखें।
- परिवार को अपनी कंपनी, पता और संपर्क जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराते रहें।
- किसी भी परेशानी की स्थिति में तुरंत भारतीय दूतावास से संपर्क करें।
प्रवासी मजदूरों के लिए मजबूत नीति की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशों में कार्यरत भारतीय मजदूर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए उनके अधिकारों की सुरक्षा, आपातकालीन सहायता, कानूनी मदद और पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने जैसी प्रक्रियाओं को और तेज एवं सरल बनाया जाना चाहिए।
राज्य सरकारों को भी ऐसे परिवारों की पहचान कर तत्काल आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
निष्कर्ष
दुबई में गिरिडीह के प्रवासी मजदूर लालचंद महतो की मौत एक बेहद दुखद घटना है। रोजगार की तलाश में विदेश गए एक श्रमिक का इस तरह संकट में फंसना और फिर असमय निधन होना कई गंभीर सवाल छोड़ जाता है। अब सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि संबंधित एजेंसियां जल्द से जल्द उनका पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया पूरी करें और शोकाकुल परिवार को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएं।
यह घटना समाज और सरकार दोनों के लिए एक संदेश है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की सुरक्षा, सहायता और अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा का सामना न करना पड़े।







