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MGM अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, घंटों इंतजार के बाद मरीजों का हंगामा, बिना जांच लौटे कई लोग | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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MGM अस्पताल अल्ट्रासाउंड सेवा : जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह से जांच कराने पहुंचे दर्जनों मरीज घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं होने पर उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा। इससे अस्पताल परिसर में नाराजगी बढ़ गई और मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया।

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों की उपलब्धता पर सवाल खड़े करती है। मरीजों का कहना है कि दूर-दराज के इलाकों से आने के बावजूद उन्हें समय पर जांच की सुविधा नहीं मिल सकी।

घंटों इंतजार के बाद लौटे मरीज

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह से ही बड़ी संख्या में मरीज अल्ट्रासाउंड जांच के लिए अस्पताल पहुंचे थे। कई मरीजों ने पर्ची बनवाई और अपनी बारी का इंतजार किया। लेकिन काफी देर बाद उन्हें बताया गया कि तकनीकी या अन्य कारणों से अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो सकेगी।

इस सूचना के बाद मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी फैल गई। कई लोगों ने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों से लंबी दूरी तय करके अस्पताल पहुंचे थे और बिना जांच कराए लौटना उनके लिए आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से नुकसानदायक है।

मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन पर उठाए सवाल

अस्पताल पहुंचे लोगों ने आरोप लगाया कि यदि अल्ट्रासाउंड सेवा उपलब्ध नहीं थी तो इसकी जानकारी पहले ही दे दी जानी चाहिए थी। इससे मरीजों का समय और पैसा दोनों बच सकता था।

परिजनों का कहना था कि कई मरीज गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और डॉक्टरों ने तत्काल अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी थी। ऐसे में जांच नहीं होने से इलाज भी प्रभावित हुआ।

सरकारी अस्पतालों में बढ़ रही चुनौतियां

MGM अस्पताल पूर्वी सिंहभूम सहित आसपास के जिलों के हजारों मरीजों के इलाज का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज विभिन्न जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अल्ट्रासाउंड जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवा में बाधा आने से मरीजों के इलाज में देरी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, पेट संबंधी रोगों, किडनी और अन्य बीमारियों के मरीजों के लिए यह जांच बेहद आवश्यक होती है।

निजी जांच केंद्रों का सहारा लेने को मजबूर मरीज

सरकारी अस्पताल में जांच नहीं होने के बाद कई मरीजों को मजबूरी में निजी डायग्नोस्टिक सेंटर का रुख करना पड़ा। निजी केंद्रों पर जांच का खर्च सरकारी अस्पताल की तुलना में काफी अधिक होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

मरीजों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा देना है, लेकिन यदि मूलभूत जांच ही समय पर उपलब्ध नहीं होगी तो गरीब मरीजों की परेशानी और बढ़ जाएगी।

अस्पताल प्रबंधन से व्यवस्था सुधारने की मांग

मरीजों और सामाजिक संगठनों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि अल्ट्रासाउंड सेवा जल्द से जल्द नियमित की जाए। साथ ही यदि किसी कारणवश जांच सेवा बाधित हो तो इसकी सूचना पहले से सार्वजनिक की जाए, ताकि मरीजों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में उपकरणों का नियमित रखरखाव, पर्याप्त तकनीशियनों की उपलब्धता और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर उठे सवाल

यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को भी उजागर करती है। राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने का दावा करते हैं, लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं मरीजों के विश्वास को प्रभावित करती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जांच सेवाओं में व्यवधान केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य प्रबंधन की चुनौती भी है। यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो मरीजों को बार-बार इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

क्या है अल्ट्रासाउंड जांच का महत्व?

अल्ट्रासाउंड एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय जांच है, जिसके माध्यम से शरीर के अंदरूनी अंगों की स्थिति का पता लगाया जाता है। गर्भावस्था की निगरानी, लीवर, किडनी, पित्ताशय, पेट और अन्य कई रोगों के निदान में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। समय पर जांच नहीं होने से इलाज में देरी और रोग की गंभीरता बढ़ने का खतरा भी रहता है।

निष्कर्ष

जमशेदपुर के MGM अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा बाधित होने से मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। घंटों इंतजार के बाद बिना जांच लौटने की मजबूरी ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरत इस बात की है कि अस्पताल प्रशासन ऐसी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले, ताकि मरीजों को समय पर जांच और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि सरकारी अस्पतालों में आवश्यक जांच सेवाएं बिना किसी रुकावट के संचालित होती रहें।

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