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गिरिडीह में मोबाइल डाउनलोड करते ही खाली हो जाता था अकाउंट! आखिर कैसे काम कर रहा था यह खतरनाक जाल | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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गिरिडीह साइबर ठगी : झारखंड के गिरिडीह जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी APK फाइल के जरिए लोगों को ठगने का काम कर रहे थे।यह कार्रवाई गांडेय थाना क्षेत्र में की गई, जहां पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग मोबाइल के माध्यम से ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहे हैं। इसके बाद साइबर थाना की टीम ने त्वरित छापेमारी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

कौन हैं आरोपी?

पुलिस ने जिन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान अमजद अंसारी और रजाउल अंसारी के रूप में हुई है। दोनों लंबे समय से साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े हुए थे और लोगों को डिजिटल तरीके से निशाना बना रहे थे।पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए, जिससे यह साफ हो गया कि यह कोई छोटा-मोटा फ्रॉड नहीं, बल्कि सुनियोजित साइबर अपराध था।

कैसे करते थे ठगी?

जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को व्हाट्सएप और अन्य माध्यमों के जरिए फर्जी APK फाइल भेजते थे। ये फाइलें देखने में बिल्कुल असली ऐप जैसी लगती थीं, लेकिन असल में ये एक तरह का मैलवेयर (Malicious Software) होती थीं।

आरोपी जिन फर्जी APK फाइलों का इस्तेमाल करते थे, उनमें शामिल हैं:

  • “RTO e challan 17.apk”
  • “RTO Challan check now.apk”
  • “IndusInd Bank e-KYC update.apk”

इन फाइलों के जरिए लोगों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि यह सरकारी या बैंक से जुड़ी जरूरी जानकारी है।

APK फाइल डाउनलोड करते ही क्या होता था?

जैसे ही कोई व्यक्ति इस APK फाइल को डाउनलोड और इंस्टॉल करता था, उसका मोबाइल फोन साइबर अपराधियों के नियंत्रण में चला जाता था।

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • फोन का डेटा एक्सेस हो जाता है
  • OTP और बैंकिंग जानकारी चोरी हो जाती है
  • मोबाइल का पूरा कंट्रोल हैकर के पास चला जाता है

इस तरह आरोपी आसानी से लोगों के बैंक खातों से पैसे निकाल लेते थे।

ठगी का नेटवर्क कितना बड़ा?

हालांकि इस केस में अभी शुरुआती जानकारी सामने आई है, लेकिन पुलिस का मानना है कि यह गिरोह बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।

देश के कई हिस्सों में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां साइबर अपराधी:

  • फर्जी KYC अपडेट के नाम पर लिंक भेजते हैं
  • बैंक या सरकारी ऐप का रूप देकर धोखा देते हैं
  • लोगों के खाते से लाखों रुपये निकाल लेते हैं

इससे यह साफ है कि यह समस्या केवल गिरिडीह तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में फैल चुकी है।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?

गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं:

  • 6 मोबाइल फोन
  • 4 सिम कार्ड
  • एक बाइक

इन सभी उपकरणों का इस्तेमाल साइबर ठगी को अंजाम देने में किया जाता था।

कैसे मिली पुलिस को सफलता?

इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत गुप्त सूचना से हुई थी।

  • 29 मार्च को पुलिस को सूचना मिली
  • साइबर थाना प्रभारी के नेतृत्व में टीम बनाई गई
  • तुरंत छापेमारी की गई
  • मौके से दोनों आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए

यह कार्रवाई दिखाती है कि साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस लगातार सक्रिय है।

देशभर में बढ़ रहा APK फ्रॉड

आज के समय में APK फाइल के जरिए ठगी तेजी से बढ़ रही है।

हाल के मामलों में देखा गया है कि:

  • लोगों को व्हाट्सएप पर फर्जी लिंक भेजे जाते हैं
  • सरकारी योजनाओं या बैंक के नाम का इस्तेमाल होता है
  • ऐप डाउनलोड करते ही फोन हैक हो जाता है

एक रिपोर्ट के अनुसार, कई लोग लाखों रुपये गंवा चुके हैं, सिर्फ एक APK फाइल डाउनलोड करने के कारण।

क्यों खतरनाक है APK फ्रॉड?

APK फाइल फ्रॉड इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि:

  1. यह असली ऐप जैसा दिखता है
  2. लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं
  3. इंस्टॉल करते ही पूरा फोन खतरे में आ जाता है
  4. बैंकिंग डेटा तक पहुंच मिल जाती है

कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से?

पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है:

  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
  • APK फाइल कभी डाउनलोड न करें
  • केवल Google Play Store या आधिकारिक वेबसाइट से ही ऐप डाउनलोड करें
  • OTP और बैंक डिटेल किसी से साझा न करें
  • किसी भी संदेह पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें

लोगों में डर और चिंता

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर का माहौल है।लोगों का कहना है कि अब ठगी के तरीके इतने आधुनिक हो गए हैं कि पहचान करना मुश्किल हो गया है।

निष्कर्ष

गिरिडीह में फर्जी APK फाइल के जरिए ठगी करने वाले दो साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी एक बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन यह घटना एक चेतावनी भी है।डिजिटल दुनिया में छोटी सी गलती भी भारी नुकसान का कारण बन सकती है।अब जरूरत है जागरूकता और सतर्कता की, ताकि ऐसे साइबर अपराधों से बचा जा सके और समाज को सुरक्षित रखा जा सके।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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