झारखंड डेंगू : झारखंड में मॉनसून के सक्रिय होने के साथ ही डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए राज्य स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट जारी करते हुए व्यापक रोकथाम अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी इलाके में डेंगू का मरीज मिलता है तो उसके घर के आसपास 1 किलोमीटर के दायरे में विशेष सर्वे, लार्वा जांच और जरूरत पड़ने पर फॉगिंग कराई जाएगी। इसका उद्देश्य संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोकना और बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करना है।
मॉनसून में क्यों बढ़ जाता है डेंगू का खतरा?
बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने से एडीज एजिप्टी मच्छर तेजी से पनपते हैं। यही मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को फैलाते हैं। यह मच्छर साफ और रुके हुए पानी में अंडे देता है। कूलर, पानी की टंकी, गमलों की तश्तरी, पुराने टायर, नारियल के खोल, प्लास्टिक के डिब्बे और अन्य खुले बर्तनों में जमा पानी इनके लिए सबसे अनुकूल स्थान होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पानी जमा होने से रोका जाए और नियमित सफाई की जाए तो डेंगू के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।
मरीज मिलने पर क्या होगी कार्रवाई?
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार, किसी भी क्षेत्र में डेंगू का मरीज मिलने पर तत्काल रैपिड रिस्पांस टीम सक्रिय होगी। इसके तहत मरीज के घर और आसपास के 1 किलोमीटर क्षेत्र में घर-घर सर्वे किया जाएगा।
इस दौरान टीम निम्न कार्य करेगी—
- घरों में लार्वा की जांच।
- पानी जमा होने वाले स्थानों की पहचान।
- लार्वा नष्ट करने के लिए आवश्यक कार्रवाई।
- लोगों को डेंगू से बचाव के उपायों की जानकारी।
- जरूरत पड़ने पर फॉगिंग और दवा का छिड़काव।
यदि किसी क्षेत्र में एक से अधिक मरीज मिलते हैं तो निगरानी और अधिक सख्त की जाएगी तथा नियमित निरीक्षण किया जाएगा।
30 नवंबर तक चलेगा विशेष अभियान
स्वास्थ्य विभाग ने शहरी निकायों और जिला प्रशासन के सहयोग से 30 नवंबर तक विशेष डेंगू नियंत्रण अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान के दौरान प्रशिक्षित टीमें नियमित रूप से मोहल्लों और गांवों में जाकर निरीक्षण करेंगी।
प्रत्येक टीम को प्रतिदिन कई घरों का निरीक्षण करने का लक्ष्य दिया गया है। जहां भी मच्छरों के लार्वा मिलेंगे, वहां तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
अस्पतालों को भी किया गया अलर्ट
डेंगू के संभावित मामलों को देखते हुए सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि—
- जिला अस्पतालों में डेंगू वार्ड तैयार रहें।
- प्रत्येक बेड पर मच्छरदानी उपलब्ध हो।
- जांच किट और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त भंडार रखा जाए।
- गंभीर मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
इसके अलावा राज्य के चिन्हित अस्पतालों में डेंगू और चिकनगुनिया की जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
डेंगू के प्रमुख लक्षण
डेंगू के लक्षण सामान्य बुखार से अलग हो सकते हैं। यदि इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
- तेज बुखार
- सिरदर्द
- आंखों के पीछे दर्द
- मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द
- त्वचा पर लाल चकत्ते
- अत्यधिक कमजोरी
- मतली या उल्टी
- प्लेटलेट्स में गिरावट
गंभीर स्थिति में नाक या मसूड़ों से खून आना, सांस लेने में तकलीफ या लगातार उल्टी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
डेंगू से बचाव के आसान उपाय
डेंगू से बचाव इलाज से कहीं अधिक प्रभावी माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से निम्न सावधानियां अपनाने की अपील की है—
- घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदलें।
- पानी की टंकियों को ढककर रखें।
- पुराने टायर, टूटे बर्तन और प्लास्टिक के डिब्बे खुले में न रखें।
- पूरी बाजू के कपड़े पहनें।
- मच्छरदानी और मच्छररोधी क्रीम का उपयोग करें।
- सुबह और शाम विशेष सावधानी बरतें क्योंकि एडीज मच्छर दिन में भी काटता है।
- बुखार आने पर स्वयं दवा लेने की बजाय डॉक्टर से जांच कराएं।
लोगों की भागीदारी है सबसे जरूरी
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि केवल सरकारी अभियान से डेंगू पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसमें आम लोगों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। यदि प्रत्येक परिवार सप्ताह में सिर्फ 10 मिनट अपने घर और आसपास की सफाई पर ध्यान दे तो डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन को काफी हद तक रोका जा सकता है।
नगर निकायों, पंचायतों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों से भी जागरूकता अभियान चलाने की अपील की गई है ताकि अधिक से अधिक लोग डेंगू से बचाव के उपाय अपनाएं।
झारखंड में स्वास्थ्य विभाग की रणनीति
राज्य सरकार इस वर्ष डेंगू नियंत्रण को लेकर पहले से अधिक सतर्क दिखाई दे रही है। मॉनसून शुरू होते ही निगरानी बढ़ा दी गई है। जिलों को नियमित रिपोर्ट भेजने, संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच कराने और प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे संक्रमण की श्रृंखला को शुरुआती चरण में ही रोका जा सकेगा।
निष्कर्ष
मॉनसून के दौरान डेंगू का खतरा हर वर्ष बढ़ता है, लेकिन समय पर सतर्कता और सामूहिक प्रयास से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। झारखंड स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीज मिलने पर 1 किलोमीटर के दायरे में सर्वे, लार्वा जांच और फॉगिंग का निर्णय संक्रमण रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि नागरिक भी साफ-सफाई बनाए रखें, पानी जमा न होने दें और बुखार होने पर तुरंत जांच कराएं, तो डेंगू के बढ़ते खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है।







