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झारखंड के 76% स्कूलों में तंबाकू का खतरा, बच्चों को बचाने के लिए सरकार का बड़ा अभियान शुरू | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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तंबाकू अभियान : झारखंड में स्कूली बच्चों के बीच बढ़ते तंबाकू सेवन को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य के करीब 76 प्रतिशत स्कूलों में किसी न किसी रूप में तंबाकू उपयोग के संकेत मिले हैं। इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग दोनों अलर्ट मोड में आ गए हैं। सरकार ने अब स्कूलों और आसपास के इलाकों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है।

यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं में नशे की लत और गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

11 से 18 जून तक चलेगा विशेष अभियान

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्यभर के स्कूलों में 11 जून से 18 जून तक विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस दौरान स्कूलों में रैली, निबंध प्रतियोगिता, शपथ कार्यक्रम, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। अभियान का उद्देश्य छात्रों को तंबाकू के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकने और शिक्षण संस्थानों को पूरी तरह तंबाकू मुक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से इसकी निगरानी करेंगे।

स्कूलों के आसपास खुलेआम बिक रहे तंबाकू उत्पाद

राज्य के कई जिलों में स्कूलों के बाहर गुटखा, खैनी, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद आसानी से बिकते देखे जा सकते हैं। नियमों के अनुसार किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 मीटर के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन कमजोर नजर आता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में तंबाकू सेवन की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा और दोस्तों के प्रभाव से होती है। जब स्कूल के बाहर आसानी से ये उत्पाद उपलब्ध होते हैं तो किशोर उम्र के छात्र तेजी से इसकी गिरफ्त में आ जाते हैं।

13 से 15 वर्ष के बच्चे भी तंबाकू की चपेट में

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के कई छात्र किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि कम उम्र में तंबाकू की लत लगने पर भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि किशोरावस्था में तंबाकू सेवन शुरू करने वाले युवाओं में बाद में कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि सरकार अब स्कूल स्तर पर रोकथाम की रणनीति को मजबूत करना चाहती है।

सरकार की सख्ती बढ़ी

झारखंड सरकार ने पहले भी सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू सेवन और बिक्री को लेकर कई कदम उठाए हैं। राज्य में संशोधित कानून के तहत स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री दंडनीय अपराध मानी गई है। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माने का प्रावधान भी बढ़ाया गया है।

शिक्षा सचिव द्वारा सभी जिलों के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों के आसपास अभियान चलाकर तंबाकू बिक्री पर रोक सुनिश्चित की जाए। इसके लिए विशेष निगरानी दल भी बनाए जा सकते हैं।

शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका अहम

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी अभियान से समस्या का समाधान संभव नहीं होगा। बच्चों को तंबाकू से दूर रखने में शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

कई बार बच्चे दोस्तों के दबाव, सोशल मीडिया या फिल्मों से प्रभावित होकर तंबाकू की ओर आकर्षित होते हैं। ऐसे में परिवार और स्कूल दोनों को मिलकर बच्चों को सही दिशा देने की जरूरत है। स्कूलों में नियमित काउंसलिंग और स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम चलाने की भी मांग उठ रही है।

सोशल मीडिया और युवा संस्कृति का प्रभाव

आज के समय में सोशल मीडिया युवाओं की जीवनशैली पर बड़ा प्रभाव डाल रहा है। कई बार ऑनलाइन कंटेंट और फिल्मों में धूम्रपान या गुटखा सेवन को स्टाइल के रूप में दिखाया जाता है, जिसका असर किशोरों पर पड़ता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि तंबाकू कंपनियां अप्रत्यक्ष विज्ञापनों और आकर्षक पैकेजिंग के जरिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश करती हैं। यही कारण है कि सरकार अब जागरूकता कार्यक्रमों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का भी उपयोग बढ़ाने जा रही है।

“तंबाकू मुक्त युवा अभियान” पर जोर

झारखंड में पहले भी “तंबाकू मुक्त युवा अभियान” जैसे कार्यक्रम चलाए जा चुके हैं। इन अभियानों के तहत स्कूलों और गांवों में जागरूकता रैली, हस्ताक्षर अभियान और स्वास्थ्य शिविर लगाए गए थे। सरकार का दावा है कि इन अभियानों का सकारात्मक असर देखने को मिला है।

अब नए अभियान के जरिए राज्य के अधिक से अधिक स्कूलों को “तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान” घोषित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए स्कूलों में विशेष बोर्ड लगाने, नियमित जांच और जागरूकता गतिविधियों को अनिवार्य बनाया जा सकता है।

ग्रामीण इलाकों में ज्यादा चुनौती

ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू सेवन की समस्या अधिक गंभीर मानी जा रही है। कई गांवों में खैनी और गुटखा सामाजिक आदत के रूप में स्वीकार किए जाते हैं। इसका असर बच्चों और किशोरों पर भी पड़ता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गांव स्तर पर जागरूकता नहीं बढ़ाई गई तो केवल शहरों में अभियान चलाने से बड़ा बदलाव संभव नहीं होगा। इसलिए इस बार पंचायत स्तर तक कार्यक्रम पहुंचाने की योजना बनाई गई है।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा

तंबाकू सेवन केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समस्या भी है। कम उम्र में नशे की आदत पढ़ाई, मानसिक विकास और करियर पर नकारात्मक असर डालती है। कई छात्र धीरे-धीरे पढ़ाई से दूर होने लगते हैं और गलत संगति में फंस जाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण देना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते कठोर कदम उठाए जाएं तो हजारों बच्चों को नशे की गिरफ्त में जाने से बचाया जा सकता है।

आगे क्या?

राज्य सरकार अब इस अभियान को बड़े स्तर पर चलाने की तैयारी में है। स्कूलों के बाहर जांच अभियान, दुकानदारों पर कार्रवाई, जागरूकता कार्यक्रम और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए तंबाकू मुक्त वातावरण बनाने की कोशिश होगी।

हालांकि असली चुनौती इन नियमों को जमीन पर लागू करने की है। यदि प्रशासन, स्कूल प्रबंधन, अभिभावक और समाज मिलकर काम करें तो झारखंड को तंबाकू मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। फिलहाल राज्य में सामने आए आंकड़ों ने सभी को सोचने पर मजबूर जरूर कर दिया है कि आखिर बच्चों का भविष्य कितना सुरक्षित है।

निष्कर्ष

झारखंड के स्कूलों में तंबाकू सेवन से जुड़े सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। कम उम्र में बच्चों का नशे की ओर बढ़ना केवल स्वास्थ्य नहीं, बल्कि समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा है। सरकार द्वारा शुरू किया गया जागरूकता अभियान एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन इसकी सफलता तभी संभव है जब प्रशासन, स्कूल, अभिभावक और समाज मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। यदि समय रहते सख्ती और जागरूकता दोनों पर बराबर ध्यान दिया गया, तो आने वाली पीढ़ी को तंबाकू जैसी खतरनाक लत से बचाया जा सकता है।

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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