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JPSC-JSSC परीक्षा में 350 से ज्यादा OMR शीट में हेरफेर का आरोप, चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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JPSC-JSSC परीक्षा में OMR हेरफेर : झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए JPSC-JSSC परीक्षा से जुड़ी एक बेहद गंभीर खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की कुछ परीक्षाओं में 350 से अधिक OMR शीट में कथित हेरफेर किए जाने का आरोप है। इस मामले ने राज्य की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, सुरक्षा और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

12 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL पर JPSC के अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, ये आरोप जांच और कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं तथा किसी व्यक्ति या संस्था की अंतिम दोषसिद्धि सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष के आधार पर ही मानी जाएगी।

TDPL को लेकर क्या है विवाद?

रिपोर्ट में उपलब्ध दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि TDPL को पहले JSSC की परीक्षाओं के संचालन का काम मिला था। बाद में 20 मई 2025 को JSSC ने गंभीर अनियमितताओं, लापरवाही और अधिक दर पर भुगतान की मांग जैसे आरोपों के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया था।

इसके बावजूद रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 के बाद JPSC की कुछ परीक्षाओं में इसी कंपनी को End-to-End परीक्षा संचालन का काम दिया गया। इसी बिंदु को लेकर परीक्षा प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

FRO परीक्षा की 350 से अधिक OMR शीट में कथित छेड़छाड़

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू Forest Range Officer यानी FRO परीक्षा से जुड़ा है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि FRO परीक्षा की 350 से अधिक OMR शीट में हेरफेर किया गया।

इसके अलावा Assistant Conservator of Forest यानी ACF परीक्षा की 150 से अधिक OMR शीट में भी कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है। यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका असर केवल कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लग सकता है।

OMR शीट प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थी के उत्तरों का आधिकारिक रिकॉर्ड होती है। इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की अनधिकृत छेड़छाड़ परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता को सीधे प्रभावित कर सकती है।

अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने का आरोप

रिपोर्ट में एक कथित परीक्षा सिंडिकेट पर अभ्यर्थियों को चयन का भरोसा देकर पैसे लेने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इसमें प्रारंभिक परीक्षा में पास कराने के लिए करीब 5 लाख रुपये, अंतिम चयन के लिए 25 लाख रुपये और इंटरव्यू या मेन्स में मदद के नाम पर 10 से 25 लाख रुपये तक की रकम मांगने का आरोप बताया गया है।

ऐसे आरोप इसलिए भी गंभीर हैं क्योंकि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में लाखों युवा वर्षों तक तैयारी करते हैं। यदि किसी अभ्यर्थी को पैसे के बदले चयन का भरोसा दिया जाता है, तो यह न केवल अभ्यर्थियों के आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि मेहनत और योग्यता आधारित चयन व्यवस्था पर भी चोट करता है।

अभ्यर्थियों के दस्तावेज लेने का भी आरोप

रिपोर्ट में यह भी आरोप है कि कथित गिरोह द्वारा कुछ अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र, कैंसिल चेक, हस्ताक्षर किए हुए खाली स्टांप पेपर और हस्ताक्षर किए हुए A4 पेपर तक लिए जाते थे।

यदि जांच एजेंसियां इन आरोपों की पुष्टि करती हैं, तो यह मामला केवल परीक्षा में अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें आर्थिक धोखाधड़ी, दस्तावेजों के दुरुपयोग और संगठित तरीके से भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे पहलुओं की भी जांच आवश्यक हो सकती है।

परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता क्यों जरूरी?

JPSC और JSSC जैसी संस्थाओं के माध्यम से राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर नियुक्तियां होती हैं। इन परीक्षाओं में ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक के हजारों-लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं।

ऐसी स्थिति में परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसियों, OMR शीट की सुरक्षा, डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में मजबूत निगरानी बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञ दृष्टिकोण से देखें तो किसी भी परीक्षा व्यवस्था में मल्टी-लेयर सिक्योरिटी, डिजिटल लॉग, CCTV रिकॉर्डिंग, OMR की ट्रैकिंग, स्वतंत्र ऑडिट और सुरक्षित डेटा बैकअप जैसी व्यवस्थाएं पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।

जांच से ही सामने आएगा पूरा सच

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सामने आए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो। OMR शीट में कथित हेरफेर की वास्तविक संख्या, इसमें शामिल लोगों की भूमिका और परीक्षा परिणाम पर पड़े प्रभाव का निर्धारण दस्तावेजी जांच और तकनीकी फोरेंसिक प्रक्रिया से किया जाना चाहिए।

यदि किसी परीक्षा में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए आयोग और सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। वहीं, यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं, तो तथ्यात्मक स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि अफवाहों पर रोक लग सके।

JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के लिए क्या मायने रखता है?

JPSC-JSSC परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह मामला बेहद महत्वपूर्ण है। अभ्यर्थियों को सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा करने के बजाय आयोग के आधिकारिक नोटिस और प्रमाणित जानकारी को प्राथमिकता देनी चाहिए।

साथ ही, परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या एजेंट द्वारा पैसे के बदले चयन का दावा किए जाने पर सावधानी बरतना जरूरी है। भर्ती परीक्षाओं में सफलता का भरोसा देकर पैसे मांगना गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है।

निष्कर्ष

JPSC-JSSC परीक्षा में 350 से ज्यादा OMR शीट में कथित हेरफेर का मामला झारखंड की भर्ती व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। FRO परीक्षा की 350 से अधिक और ACF परीक्षा की 150 से अधिक OMR शीट में कथित छेड़छाड़ के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने और महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल करने के आरोप मामले को और गंभीर बनाते हैं।

अब सबसे बड़ी जरूरत निष्पक्ष जांच, तथ्यात्मक रिपोर्ट और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की है। लाखों ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा है। इसलिए JPSC और JSSC परीक्षाओं में निष्पक्षता, सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना राज्य की भर्ती व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

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