रांची डेंगू रोकथाम प्रशिक्षण : झारखंड की राजधानी रांची में डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। क्षेत्रीय मलेरिया कार्यालय में आयोजित इस प्रशिक्षण में कम्युनिटी वॉलंटियर्स, फाइलेरिया यूनिट के कर्मचारियों तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न कर्मियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य डेंगू और चिकुनगुनिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए रोकथाम, समय पर पहचान, सर्विलांस और जनजागरूकता को मजबूत बनाना था।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मानसून के दौरान जलभराव और साफ पानी में एडीज मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में यदि समय रहते लोगों को जागरूक नहीं किया गया तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसलिए सामुदायिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना बेहद जरूरी है।
डेंगू और चिकुनगुनिया की रोकथाम पर दिया गया विस्तृत प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को डेंगू और चिकुनगुनिया फैलाने वाले एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) मच्छर की पहचान, उसके जीवन चक्र और प्रजनन स्थलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया गया कि यह मच्छर साफ और रुके हुए पानी में अंडे देता है तथा दिन के समय अधिक सक्रिय रहता है।
प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि यदि शुरुआती स्तर पर मच्छरों के लार्वा को नष्ट कर दिया जाए तो बीमारी फैलने की संभावना काफी कम हो जाती है। इसके लिए नियमित निरीक्षण, लार्वा सर्वे, फॉगिंग और लार्वानाशी दवाओं के उचित उपयोग की जानकारी दी गई।
कम्युनिटी वॉलंटियर्स निभाएंगे अहम भूमिका
प्रशिक्षण में स्वास्थ्य विभाग ने कम्युनिटी वॉलंटियर्स की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। अधिकारियों ने कहा कि ये स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे और उन्हें बताएंगे कि डेंगू तथा चिकुनगुनिया से बचाव के लिए किन सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।
इसके अलावा स्वयंसेवक संभावित मरीजों की पहचान कर स्वास्थ्य विभाग को समय पर सूचना देंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल जांच और उपचार सुनिश्चित किया जा सके।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है डेंगू का खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। यदि यह पानी कई दिनों तक रुका रहे तो वहां एडीज मच्छरों का प्रजनन शुरू हो जाता है। यही मच्छर डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों के प्रमुख वाहक होते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों, छतों, आंगन और आसपास किसी भी स्थान पर पानी जमा न होने दें। सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर, गमले, फूलदान और पानी रखने वाले सभी बर्तनों को खाली कर अच्छी तरह साफ करें।
इन स्थानों पर रखें विशेष नजर
प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि निम्न स्थानों पर सबसे अधिक मच्छरों के लार्वा पाए जाते हैं—
- कूलर और पानी की टंकियां
- पुराने टायर
- गमले और फूलदान
- नारियल के खोल
- टूटे हुए बर्तन
- प्लास्टिक के डिब्बे
- छतों पर जमा वर्षा का पानी
- निर्माणाधीन भवनों में जमा पानी
यदि इन स्थानों की नियमित सफाई की जाए तो डेंगू के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
प्रशिक्षण में चिकित्सकों ने बताया कि डेंगू और चिकुनगुनिया के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत नजदीकी सरकारी या निजी अस्पताल में जांच करानी चाहिए।
समय पर इलाज मिलने से मरीज जल्द स्वस्थ हो सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग की लोगों से अपील
स्वास्थ्य विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास सफाई बनाए रखें तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को समाप्त करने में प्रशासन का सहयोग करें। अधिकारियों ने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। जब तक आम लोग स्वयं जागरूक होकर अपने घर और मोहल्ले की साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखेंगे, तब तक डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं होगा।
डेंगू और चिकुनगुनिया से बचाव के आसान उपाय
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- सप्ताह में एक बार कूलर और पानी की टंकियों की सफाई करें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम का उपयोग करें।
- सुबह और शाम विशेष सावधानी बरतें।
- बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें।
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
- अपने मोहल्ले में साफ-सफाई अभियान में भाग लें।
जनभागीदारी से ही मिलेगा डेंगू पर नियंत्रण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि डेंगू और चिकुनगुनिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में जनभागीदारी सबसे प्रभावी उपाय है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखे, पानी जमा न होने दे और समय पर स्वास्थ्य जांच कराए, तो संक्रमण की श्रृंखला को आसानी से तोड़ा जा सकता है।
रांची में आयोजित यह एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि प्रशिक्षित स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर डेंगू और चिकुनगुनिया के मामलों को कम करने में अहम भूमिका निभाएंगे। आने वाले दिनों में इस तरह के प्रशिक्षण और जनजागरूकता अभियान जिले के अन्य क्षेत्रों में भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि पूरे रांची जिले को मच्छरजनित बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सके।







