रांची पथ विक्रेता प्रदर्शन : झारखंड की राजधानी रांची में मंगलवार को पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर्स) ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर रांची नगर निगम (RMC) कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में विक्रेता निगम कार्यालय के बाहर जुटे और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन का असर शहर की यातायात व्यवस्था पर भी पड़ा। नगर निगम कार्यालय और आसपास के प्रमुख मार्गों पर कई घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पथ विक्रेताओं का कहना है कि नगर निगम द्वारा लगातार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है, लेकिन उनके पुनर्वास और वैकल्पिक वेंडिंग जोन की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला लिया।
क्यों हुआ नगर निगम कार्यालय का घेराव?
रांची नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न इलाकों, विशेषकर मोराबादी और अन्य व्यस्त बाजार क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई के दौरान कई पथ विक्रेताओं को अपनी दुकानें हटानी पड़ीं। विक्रेताओं का आरोप है कि बिना स्थायी व्यवस्था किए उन्हें हटा दिया गया, जिससे उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि वे वर्षों से शहर में छोटे स्तर पर व्यवसाय कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
घंटों प्रभावित रही यातायात व्यवस्था
नगर निगम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के कारण कचहरी चौक, शहीद चौक, मेन रोड, लालपुर और आसपास के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई। कार्यालय आने-जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल वाहनों, मरीजों और आम नागरिकों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कई स्थानों पर डायवर्जन लागू किया और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। हालांकि प्रदर्शन समाप्त होने के बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका।
पथ विक्रेताओं की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम प्रशासन के समक्ष कई मांगें रखीं। इनमें प्रमुख रूप से—
- सभी प्रभावित पथ विक्रेताओं का पुनर्वास किया जाए।
- वैकल्पिक वेंडिंग जोन का तत्काल निर्माण किया जाए।
- स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- बिना सर्वे और नोटिस के हटाने की कार्रवाई बंद की जाए।
- नगर निगम और पथ विक्रेता संगठनों के बीच नियमित संवाद स्थापित किया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
क्या कहता है स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट?
स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट, 2014 का उद्देश्य पथ विक्रेताओं की आजीविका की सुरक्षा करना और उन्हें नियोजित तरीके से व्यवसाय करने का अधिकार देना है।
इस कानून के तहत स्थानीय निकायों को सर्वे कर वेंडिंग जोन निर्धारित करने, पहचान पत्र जारी करने और बिना उचित प्रक्रिया अपनाए किसी भी पथ विक्रेता को नहीं हटाने का प्रावधान है। पथ विक्रेता इसी कानून का हवाला देते हुए अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष
प्रदर्शन के दौरान नगर निगम कार्यालय के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस अधिकारियों और निगम के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों को सुना। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कर समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। उनका कहना है कि जब तक पुनर्वास की स्पष्ट योजना सामने नहीं आती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
शहर में बढ़ रही वेंडिंग जोन की जरूरत
रांची तेजी से विकसित हो रहा शहर है। आबादी बढ़ने के साथ फुटपाथों और बाजार क्षेत्रों में छोटे कारोबारियों की संख्या भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में वैज्ञानिक तरीके से वेंडिंग जोन विकसित किए जाएं, ताकि एक ओर सड़कें अतिक्रमण मुक्त रहें और दूसरी ओर हजारों परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।
शहरी विकास से जुड़े जानकारों का कहना है कि स्थायी वेंडिंग जोन, डिजिटल पंजीकरण, स्वच्छता मानकों का पालन और नियमित निगरानी से इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
आम लोगों की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के कारण जाम में फंसे कई लोगों ने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन आम नागरिकों को परेशान किए बिना समाधान खोजा जाना चाहिए।
वहीं कई लोगों ने पथ विक्रेताओं की समस्या को भी जायज बताया। उनका कहना था कि नगर निगम को अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ पुनर्वास की व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी चाहिए।
आगे क्या?
अब सभी की नजर नगर निगम प्रशासन और पथ विक्रेता संगठनों के बीच होने वाली बातचीत पर है। यदि वार्ता सफल होती है तो शहर में लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान निकल सकता है। लेकिन यदि मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में रांची में आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
शहर के नागरिकों की भी यही अपेक्षा है कि प्रशासन और पथ विक्रेता संगठन आपसी संवाद के जरिए ऐसा समाधान निकालें, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित न हों और हजारों छोटे कारोबारियों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रह सके।







