RIMS Ranch : झारखंड में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे के बीच राजधानी रांची का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल Rajendra Institute of Medical Sciences यानी RIMS पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। अस्पताल प्रशासन ने संभावित हीटस्ट्रोक मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं। अस्पताल में डेडिकेटेड बेड, अतिरिक्त दवाइयों, ORS, IV फ्लूड और मेडिकल स्टाफ की व्यवस्था की जा रही है ताकि अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने पर तुरंत इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
राज्य में मई महीने के अंतिम सप्ताह में तापमान तेजी से बढ़ा है। कई जिलों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भीषण गर्मी और लू चलने की संभावना जताई है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते एहतियात नहीं बरती गई तो हीटस्ट्रोक के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं।
RIMS में विशेष वार्ड और डेडिकेटेड बेड की तैयारी
RIMS प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में हीटवेव से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर अस्पताल में डेडिकेटेड बेड की संख्या बढ़ाई जाएगी। मेडिसिन विभाग को इस संबंध में विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि फिलहाल मरीजों की संख्या सामान्य है, लेकिन मौसम की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल सतर्क है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को हीटस्ट्रोक के मरीजों के इलाज के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। अस्पताल में ठंडे पानी, ORS और जरूरी दवाओं का अतिरिक्त स्टॉक भी रखा जा रहा है।
गर्मी में बढ़ सकता है डिहाइड्रेशन और हीट एक्सहॉशन का खतरा
चिकित्सकों के अनुसार इस समय सबसे ज्यादा खतरा डिहाइड्रेशन, हीट एक्सहॉशन और हीटस्ट्रोक का है। लगातार तेज धूप में रहने, पर्याप्त पानी नहीं पीने और लंबे समय तक खुले में काम करने वाले लोग सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। मजदूर, रिक्शा चालक, डिलीवरी बॉय, ट्रैफिक पुलिसकर्मी और खेतों में काम करने वाले किसान हाई रिस्क कैटेगरी में माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि शरीर में पानी और नमक की कमी होने पर व्यक्ति को चक्कर आना, तेज सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में हीटस्ट्रोक जानलेवा भी साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को जारी किए निर्देश
झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिलों को हीटवेव को लेकर विशेष तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अलग बेड, पर्याप्त ORS, IV फ्लूड और जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
इसके साथ ही अस्पतालों में कूलिंग सिस्टम, पंखे और पानी की व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश भी दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि सभी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की जांच के दौरान हीटस्ट्रोक के लक्षणों पर विशेष ध्यान दिया जाए।
राज्य स्तर पर हेल्पलाइन भी सक्रिय
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी NHM ने राज्य स्तर पर हीटवेव हेल्पलाइन भी सक्रिय कर दी है। नागरिक किसी भी प्रकार की हीटवेव संबंधी समस्या या आपात स्थिति में हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क कर सकते हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि समय रहते मरीजों को सहायता मिले और गंभीर स्थिति बनने से पहले इलाज शुरू हो सके। स्वास्थ्य विभाग ने जिला प्रशासन को भी जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।
डॉक्टरों ने लोगों को दी सावधानी बरतने की सलाह
डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। यदि बहुत जरूरी हो तभी बाहर निकलें और सिर को ढककर रखें। विशेषज्ञों ने कहा है कि लगातार पानी पीते रहें और शरीर को डिहाइड्रेट न होने दें।
इसके अलावा डॉक्टरों ने निम्न सावधानियां अपनाने की अपील की है—
- हल्के और सूती कपड़े पहनें
- अधिक मात्रा में पानी और ORS लें
- खाली पेट धूप में बाहर न निकलें
- बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
- ज्यादा देर तक धूप में काम करने से बचें
- चक्कर या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग हीटवेव में ज्यादा प्रभावित होते हैं। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। गर्मी में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है जिससे कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को धूप में खेलने से बचाना चाहिए और बुजुर्गों को पर्याप्त पानी पिलाना जरूरी है। छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन बहुत तेजी से होता है इसलिए अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
हर साल बढ़ रही हीटवेव की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण झारखंड समेत देश के कई हिस्सों में गर्मी लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में हीटवेव की अवधि और तीव्रता दोनों में वृद्धि हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य व्यवस्था को पहले से ज्यादा तैयार रहने की आवश्यकता है।
रांची जैसे शहर, जहां पहले मौसम अपेक्षाकृत ठंडा माना जाता था, वहां भी अब मई-जून में तापमान तेजी से बढ़ने लगा है। इसी कारण अस्पताल प्रशासन अब गर्मी को लेकर गंभीरता से तैयारी कर रहा है।
RIMS में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
RIMS पहले से ही राज्य का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल संस्थान है और हाल के वर्षों में यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार भी किया गया है। अस्पताल में नई तकनीक, आधुनिक मशीनें और अतिरिक्त बेड की व्यवस्था पर काम चल रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हीटवेव के दौरान अस्पतालों की तैयारी मजबूत रहती है तो गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकती है। इसी उद्देश्य से RIMS और अन्य सरकारी अस्पताल लगातार अपनी तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं।
लोगों की जागरूकता भी जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार केवल अस्पतालों की तैयारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम लोगों की जागरूकता भी बेहद जरूरी है। यदि लोग समय रहते सावधानी बरतें तो हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। गर्मी के मौसम में खानपान, पानी और शरीर को ठंडा रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
झारखंड में बढ़ती गर्मी को देखते हुए आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन की चुनौती और बढ़ सकती है। ऐसे में RIMS की यह तैयारी राज्य के लोगों के लिए राहत देने वाली खबर मानी जा रही है।







