RIMS रांची जलभराव : झारखंड की राजधानी रांची में लगातार हो रही बारिश का असर अब राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) पर भी साफ दिखाई देने लगा है। भारी वर्षा के कारण अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में पानी भर गया, जिससे मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद अस्पताल की जल निकासी व्यवस्था और मानसून तैयारियों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
RIMS झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, जहां हर दिन राज्य के विभिन्न जिलों से हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल के भीतर जलभराव जैसी स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा असर डालती है।
बारिश के बाद फिजियोथेरेपी विभाग में भर गया पानी
लगातार हुई बारिश के कारण अस्पताल परिसर के कई हिस्सों में पानी जमा हो गया। सबसे अधिक प्रभावित फिजियोथेरेपी विभाग रहा, जहां कमरों और गलियारों में पानी भरने से मरीजों को इलाज कराने में कठिनाई हुई। कई जगह फर्श पूरी तरह पानी में डूबा दिखाई दिया।
फिजियोथेरेपी उपचार लेने आने वाले मरीजों को भीगते हुए विभाग तक पहुंचना पड़ा। वहीं अस्पताल कर्मियों को पानी निकालने और व्यवस्था सामान्य करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।
मरीजों और परिजनों की बढ़ी परेशानी
जलभराव के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को फिसलन और गंदगी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। बुजुर्ग, दिव्यांग और ऑपरेशन के बाद इलाज करा रहे मरीजों के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण रही।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए। बारिश के मौसम में पहले से बेहतर तैयारी और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था आवश्यक है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा असर
फिजियोथेरेपी विभाग में पानी भरने से नियमित उपचार कार्य भी प्रभावित हुआ। कुछ मरीजों को इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ सेवाओं को अस्थायी रूप से प्रभावित होने की जानकारी मिली। अस्पताल प्रशासन ने पानी निकालने का कार्य शुरू कराया ताकि सेवाएं जल्द सामान्य हो सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में जलभराव केवल असुविधा का विषय नहीं बल्कि संक्रमण का खतरा भी बढ़ा सकता है। इसलिए समय पर जल निकासी और सफाई बेहद जरूरी है।
हर साल बारिश में सामने आती है समस्या
रांची में मानसून के दौरान कई सरकारी भवनों और अस्पतालों में जलभराव की शिकायतें सामने आती रही हैं। RIMS जैसे बड़े संस्थान में भी यदि बारिश के कारण विभागों में पानी भर जाए तो यह बुनियादी ढांचे की कमियों की ओर संकेत करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने और नियमित रखरखाव की आवश्यकता है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
बारिश के मौसम में अस्पताल की सेवाओं को निर्बाध बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मरीजों की सुरक्षा, साफ-सफाई और विभागों में जलभराव रोकने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक दोनों स्तरों पर कदम उठाने होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल परिसर में वर्षा जल निकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
मानसून में बढ़ जाती हैं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां
लगातार बारिश के दौरान अस्पतालों में मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है। वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, त्वचा रोग और अन्य मौसमी बीमारियों के कारण स्वास्थ्य संस्थानों पर अतिरिक्त दबाव रहता है। ऐसे समय में यदि अस्पताल का कोई विभाग जलभराव से प्रभावित हो जाए तो स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
क्या होने चाहिए सुधार?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्नलिखित कदम आवश्यक हैं—
- अस्पताल परिसर की ड्रेनेज व्यवस्था का आधुनिकीकरण।
- बारिश से पहले सभी नालियों की सफाई।
- जलभराव वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी।
- संवेदनशील विभागों में वाटरप्रूफ सुरक्षा उपाय।
- मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीम।
शहर में भी कई जगह जलजमाव
रांची में लगातार हो रही बारिश के कारण कई सड़कों और निचले इलाकों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इससे यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग ने भी लोगों को बारिश के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है।
निष्कर्ष
RIMS जैसे राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में फिजियोथेरेपी विभाग का जलभराव केवल एक विभाग की समस्या नहीं, बल्कि स्वास्थ्य ढांचे की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। मरीजों को सुरक्षित और निर्बाध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उम्मीद है कि अस्पताल प्रशासन इस घटना से सबक लेते हुए जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करेगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।







