चैती छठ महापर्व 2026: हिंदू धर्म में सूर्य उपासना का विशेष महत्व माना जाता है, और इसी आस्था का प्रतीक है चैती छठ महापर्व। यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है—पहला कार्तिक माह में और दूसरा चैत्र माह में, जिसे चैती छठ कहा जाता है।
चैती छठ मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के कुछ क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह प्रकृति, अनुशासन और आत्मसंयम का भी संदेश देता है।
चैती छठ 2026 कब है?
वर्ष 2026 में चैती छठ महापर्व 24 मार्च से 27 मार्च 2026 तक मनाया जाएगा। यह चार दिनों तक चलने वाला कठिन और पवित्र व्रत होता है।
चार दिनों का पूरा कार्यक्रम:
- नहाय-खाय: 24 मार्च 2026
- खरना: 25 मार्च 2026
- संध्या अर्घ्य: 26 मार्च 2026
- उषा अर्घ्य: 27 मार्च 2026
इन चार दिनों में व्रती अत्यंत शुद्धता, नियम और अनुशासन का पालन करते हैं।
चैती छठ का धार्मिक महत्व
चैती छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मैया (ऊषा देवी) की आराधना का पर्व है। हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना गया है, जिन्हें देखा जा सकता है और जिनकी ऊर्जा से समस्त जीवन संचालित होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- सूर्य देव स्वास्थ्य, ऊर्जा और सफलता प्रदान करते हैं
- छठी मैया संतान की रक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं
- यह व्रत करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है
कहा जाता है कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से किया गया छठ व्रत व्यक्ति की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।
चैती छठ पूजा की विधि
चैती छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है, जिसमें हर दिन का अपना विशेष महत्व और नियम होता है।
पहला दिन: नहाय-खाय
इस दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी, तालाब या घर में स्नान करते हैं। इसके बाद घर की साफ-सफाई की जाती है और पूरी शुद्धता के साथ सात्विक भोजन तैयार किया जाता है।व्रती इस दिन केवल एक बार शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं, जिससे व्रत की शुरुआत होती है।
दूसरा दिन: खरना
खरना के दिन व्रती पूरे दिन निर्जल उपवास रखते हैं। शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ और चावल से बनी खीर का प्रसाद तैयार किया जाता है।इस प्रसाद को पहले भगवान को अर्पित किया जाता है और फिर व्रती इसे ग्रहण करते हैं। इसके बाद 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू होता है, जिसमें पानी भी नहीं पिया जाता।
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन व्रती नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हैं।व्रती पानी में खड़े होकर सूर्य देव की पूजा करते हैं और प्रसाद अर्पित करते हैं। यह दृश्य अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक होता है।
चौथा दिन: उषा अर्घ्य
अंतिम दिन सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रती अपना व्रत पारण करते हैं।इस दिन परिवार और समाज में प्रसाद वितरित किया जाता है और सभी मिलकर इस पर्व की खुशी मनाते हैं।
छठ पूजा का प्रसाद
छठ पूजा में प्रसाद का अत्यंत महत्व होता है और इसे पूरी शुद्धता और नियमों के साथ बनाया जाता है।
मुख्य प्रसाद में शामिल हैं:
- ठेकुआ (गेहूं के आटे और गुड़ से बना)
- गुड़ और चावल की खीर
- कसार
- मौसमी फल (केला, नारियल, सेब)
- गन्ना
इन सभी प्रसादों को बांस की टोकरी (दौरा) में सजाकर अर्पित किया जाता है।
प्रकृति से जुड़ा अनोखा पर्व
चैती छठ की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की मूर्ति पूजा नहीं होती। इस पर्व में सूर्य, जल, वायु और मिट्टी जैसे प्राकृतिक तत्वों की पूजा की जाती है।
यह पर्व हमें यह सिखाता है कि:
- प्रकृति का सम्मान करना चाहिए
- पर्यावरण की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है
- जीवन का संतुलन प्रकृति से ही संभव है
कठिन तपस्या और आत्मसंयम का प्रतीक
छठ व्रत को हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इसमें व्रती 36 घंटे तक बिना पानी के उपवास रखते हैं।
यह व्रत न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक शक्ति की भी परीक्षा है। इसके बावजूद व्रती पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस तपस्या को पूर्ण करते हैं।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
चैती छठ महापर्व समाज में एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। इस दौरान:
- लोग मिलकर घाटों की सफाई करते हैं
- सामूहिक रूप से पूजा की जाती है
- एक-दूसरे की मदद की जाती है
यह पर्व हमें सामाजिक जिम्मेदारी और भाईचारे का संदेश देता है।
आधुनिक समय में चैती छठ का महत्व
आज के व्यस्त और आधुनिक जीवन में भी चैती छठ का महत्व कम नहीं हुआ है। लोग शहरों में रहते हुए भी पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मनाते हैं।यह पर्व हमें अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करता है।
निष्कर्ष
चैती छठ महापर्व केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आस्था, अनुशासन, प्रकृति और आत्मसंयम का अद्भुत संगम है।
यह पर्व हमें सिखाता है कि:
- धैर्य और मेहनत से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है
- प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीना चाहिए
- सच्ची आस्था से हर मनोकामना पूरी होती है




