Homeझारखंड न्यूज़इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद घर से भागे नाबालिग प्रेमी-प्रेमिका को मनोहरपुर...

इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद घर से भागे नाबालिग प्रेमी-प्रेमिका को मनोहरपुर स्टेशन से RPF ने बचाया | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

- Advertisement -spot_img

चाईबासा RPF नाबालिग प्रेमी-प्रेमिका : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सतर्कता से एक बड़ी घटना टल गई। इंस्टाग्राम पर दोस्ती के बाद घर से भागे नाबालिग प्रेमी-प्रेमिका को RPF ने समय रहते सुरक्षित बरामद कर लिया। दोनों ओडिशा के संबलपुर जाने की योजना बना रहे थे। पूछताछ में पता चला कि दोनों सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क में आए थे और पहली मुलाकात के बाद साथ भागने का फैसला किया था। RPF ने दोनों को सुरक्षित संरक्षण में लेकर बाल संरक्षण से जुड़ी सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया।

यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच किशोरों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अभिभावकों की निगरानी और संवाद कितना आवश्यक हो गया है।

मनोहरपुर रेलवे स्टेशन पर गश्त के दौरान हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, रविवार शाम रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम मनोहरपुर रेलवे स्टेशन पर नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर एक किशोर और किशोरी संदिग्ध परिस्थिति में बैठे दिखाई दिए। दोनों की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर RPF कर्मियों ने उनसे पूछताछ की।

शुरुआती पूछताछ में दोनों संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद जब उनसे अलग-अलग पूछताछ की गई तो उन्होंने स्वीकार किया कि वे अपने-अपने घर से बिना किसी को बताए भागकर आए हैं और संबलपुर जाने की तैयारी में थे।

इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती, फिर बनाई भागने की योजना

पूछताछ के दौरान सामने आया कि दोनों की पहचान कुछ समय पहले इंस्टाग्राम के माध्यम से हुई थी। सोशल मीडिया पर बातचीत धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई। रविवार को मनोहरपुर के साप्ताहिक बाजार में दोनों पहली बार आमने-सामने मिले।

पहली मुलाकात के बाद दोनों ने साथ रहने का फैसला किया और बिना परिवार को जानकारी दिए रेलवे स्टेशन पहुंच गए। उनका इरादा ट्रेन पकड़कर ओडिशा के संबलपुर जाने का था।

संबलपुर जाकर काम करने और शादी करने की थी योजना

RPF अधिकारियों के अनुसार, नाबालिग लड़के ने पूछताछ में बताया कि वह पहले संबलपुर की एक निजी कंपनी में काम कर चुका है। इसी कारण उसने वहां जाने की योजना बनाई थी।

दोनों का कहना था कि वे संबलपुर जाकर काम करेंगे और भविष्य में शादी करेंगे। हालांकि दोनों नाबालिग होने के कारण यह मामला बाल संरक्षण कानूनों के दायरे में आता है। इसी वजह से RPF ने तत्काल आवश्यक कार्रवाई करते हुए दोनों को सुरक्षित संरक्षण में लिया।

RPF की सतर्कता से टली बड़ी घटना

यदि समय रहते RPF की नजर इन दोनों पर नहीं पड़ती तो उनके साथ किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। रेलवे स्टेशन और लंबी दूरी की ट्रेनें मानव तस्करी, बाल शोषण और अन्य अपराधों के लिहाज से संवेदनशील मानी जाती हैं।

रेलवे सुरक्षा बल लगातार ऐसे मामलों पर विशेष नजर रखता है और नियमित गश्त के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने वाले बच्चों और किशोरों से पूछताछ करता है। इस सतर्कता के कारण कई बच्चों को सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया जा चुका है।

लड़की को परिजनों के सुपुर्द, लड़के को चाइल्ड लाइन भेजा गया

पूछताछ के बाद RPF ने तुरंत दोनों के परिजनों से संपर्क किया। सोमवार को चाइल्ड लाइन और बाल संरक्षण विभाग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

नाबालिग लड़की को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया, जबकि नाबालिग लड़के को आगे की काउंसलिंग और पुनर्वास प्रक्रिया के लिए चाइल्ड लाइन भेजा गया। बाल संरक्षण अधिकारियों ने दोनों की काउंसलिंग भी की ताकि भविष्य में वे इस तरह का कदम दोबारा न उठाएं।

कार्रवाई में इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका

इस पूरे अभियान का नेतृत्व RPF प्रभारी रविंद्र कुमार पांडेय ने किया। उनके साथ सब-इंस्पेक्टर इंद्रजीत कुमार, एएसआई एस.एन. यादव और महिला कांस्टेबल रितु हलदर ने सक्रिय भूमिका निभाई।

RPF अधिकारियों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण दोनों नाबालिग सुरक्षित अपने परिवार और बाल संरक्षण तंत्र तक पहुंच सके।

सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव बना चिंता का विषय

विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में इंस्टाग्राम, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए किशोर तेजी से नए लोगों के संपर्क में आते हैं। कई बार बिना पर्याप्त समझ और अनुभव के वे भावनात्मक फैसले ले लेते हैं, जिससे उनके सामने गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है।

ऑनलाइन दोस्ती हमेशा सुरक्षित नहीं होती। कई मामलों में ऐसे संबंध बच्चों को घर छोड़ने, मानव तस्करी, साइबर अपराध या अन्य खतरों की ओर धकेल सकते हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहिए और उन्हें डिजिटल सुरक्षा के बारे में जागरूक करना चाहिए।

अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के मोबाइल और सोशल मीडिया उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय उन्हें सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के बारे में शिक्षित करना अधिक प्रभावी उपाय है। यदि बच्चे किसी नए व्यक्ति से लगातार बातचीत कर रहे हों या उनके व्यवहार में अचानक बदलाव दिखाई दे तो अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

साथ ही बच्चों को यह समझाना भी जरूरी है कि किसी भी व्यक्ति से मिलने या घर छोड़ने जैसा बड़ा फैसला कभी भी परिवार की जानकारी और अनुमति के बिना नहीं लेना चाहिए।

निष्कर्ष

मनोहरपुर रेलवे स्टेशन पर RPF की सतर्कता ने दो नाबालिगों का भविष्य सुरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह घटना केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि समाज और अभिभावकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि डिजिटल दौर में बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर जागरूक निगरानी और खुला संवाद बेहद आवश्यक है। समय पर की गई कार्रवाई ने एक संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल दिया और दोनों बच्चों को सुरक्षित संरक्षण उपलब्ध कराया।

हमारे सोशल मीडिया से जुड़ें
18,600FansLike
2,607FollowersFollow
1,236FollowersFollow
1,347SubscribersSubscribe
और पढ़ें
कैटेगरीज़
जुड़ी खबरें
ब्रेकिंग न्यूज़
- Advertisement -spot_img

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here