जमशेदपुर मलेरिया अलर्ट : पूर्वी सिंहभूम जिले में बढ़ते मलेरिया संक्रमण को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग, नगर निकायों, प्रखंड प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों को मलेरिया नियंत्रण के लिए तत्काल प्रभाव से व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। बैठक में मलेरिया जांच बढ़ाने, प्रभावित क्षेत्रों में फॉगिंग तेज करने, समय पर इलाज सुनिश्चित करने और लोगों को जागरूक करने पर विशेष जोर दिया गया।
मानसून के दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ने से मलेरिया के मामलों में वृद्धि की आशंका रहती है। ऐसे में प्रशासन ने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर संक्रमण की रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।
एक लाख मलेरिया जांच का लक्ष्य
जिला प्रशासन ने बताया कि अब तक जिले में करीब 22 हजार लोगों की मलेरिया जांच की जा चुकी है। हालांकि प्रशासन ने इस अभियान को और तेज करते हुए एक लाख जांच का लक्ष्य निर्धारित किया है।
उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बुखार से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति की तत्काल जांच की जाए ताकि संक्रमित मरीजों की जल्द पहचान हो सके और समय पर इलाज शुरू किया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि अधिक जांच होने से संक्रमण की चेन तोड़ने में मदद मिलेगी और गंभीर मामलों की संख्या भी कम होगी।
गांव-गांव होगी रैपिड टेस्टिंग
ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया की शीघ्र पहचान के लिए सहियाओं और स्वास्थ्य कर्मियों को रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। उन्हें प्रशिक्षण देकर गांव स्तर पर ही जांच की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अलावा इलाज कर रहे मरीजों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग फोटो, व्हाट्सएप और डिजिटल रिपोर्टिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित करेगा कि मरीज दवाइयों का पूरा कोर्स समय पर पूरा करें।
प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी
प्रशासन ने निर्देश दिया है कि जिन पंचायतों और गांवों में मलेरिया के अधिक मामले सामने आए हैं, वहां विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए।
सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ), चिकित्सा पदाधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को रोजाना स्थिति की समीक्षा करने को कहा गया है। साथ ही प्रत्येक प्रखंड में मलेरिया नियंत्रण को लेकर नियमित बैठकें आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग उन गांवों पर विशेष नजर रखेगा जो जंगलों या सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित हैं, क्योंकि ऐसे इलाकों में संक्रमण फैलने का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
स्कूलों और छात्रावासों में चलेगा अभियान
प्रशासन ने आवासीय विद्यालयों, छात्रावासों, आश्रम विद्यालयों और हॉस्टलों में भी विशेष मलेरिया जांच अभियान चलाने का निर्णय लिया है।
यदि किसी छात्र या कर्मचारी में बुखार या मलेरिया जैसे लक्षण मिलते हैं तो उसकी तत्काल जांच कर उपचार शुरू किया जाएगा। इससे सामूहिक रूप से संक्रमण फैलने की संभावना को कम किया जा सकेगा।
फॉगिंग और दवा छिड़काव में आएगी तेजी
मलेरिया नियंत्रण के लिए प्रभावित क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर निकायों और पंचायतों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि जिन इलाकों में मच्छरों का प्रकोप अधिक है वहां निर्धारित रोस्टर के अनुसार फॉगिंग कराई जाए। जिन क्षेत्रों में फॉगिंग मशीन की कमी है वहां तुरंत मशीन उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।
इसके साथ ही इंडोर रेजिडुअल स्प्रे (IRS) अभियान को भी प्रभावी ढंग से संचालित करने और उसकी गुणवत्ता की नियमित निगरानी करने को कहा गया है।
नालों की सफाई और जलजमाव खत्म करने पर जोर
मलेरिया फैलाने वाले मच्छर गंदे और रुके हुए पानी में तेजी से पनपते हैं। इसे देखते हुए नगर निकायों को सभी बड़े और छोटे नालों की सफाई कराने तथा जलजमाव वाले स्थानों को चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का मानना है कि साफ-सफाई, जल निकासी और नियमित फॉगिंग से मच्छरों की संख्या में कमी आएगी और संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
गंभीर मरीजों को तुरंत मिलेगी एंबुलेंस
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए 30 मिनट के भीतर एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए।
यदि किसी प्रखंड में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होती है तो दूसरे प्रखंड से वाहन भेजकर मरीज को तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग को अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयों और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
जनजागरूकता अभियान होगा तेज
प्रशासन ने कहा कि मलेरिया की रोकथाम केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है।
इसलिए गांवों और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बताया जाएगा कि वे घर के आसपास पानी जमा न होने दें, मच्छरदानी का उपयोग करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और बुखार आने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
मलेरिया से बचाव के आसान उपाय
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- कूलर, टंकी और गमलों का पानी नियमित बदलें।
- तेज बुखार, ठंड लगना या सिरदर्द होने पर तुरंत मलेरिया जांच कराएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें और उपचार का पूरा कोर्स पूरा करें।
निष्कर्ष
पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने मलेरिया नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जांच, फॉगिंग, दवा वितरण, सर्विलांस और जनजागरूकता अभियान को तेज करने का फैसला किया है। मानसून के मौसम में मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है। समय पर जांच, उचित इलाज और साफ-सफाई जैसे छोटे-छोटे कदम इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि प्रशासन और जनता मिलकर प्रयास करें तो मलेरिया संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है।







