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JPSC-JSSC विवाद: सरकार और छात्रों के बीच छठे दौर की वार्ता शुरू, 16वें दिन भी जारी है आंदोलन | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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JPSC-JSSC विवाद : झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। इसी बीच झारखंड सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को रांची स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में छठे दौर की वार्ता शुरू हुई। छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना, भर्ती परीक्षाओं की जांच और JPSC-JSSC में सुधार शामिल हैं।

छठे दौर की वार्ता से समाधान की उम्मीद

JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर सरकार और छात्र संगठनों के बीच इससे पहले भी कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन पाई। शुक्रवार और शनिवार को सरकार तथा अलग-अलग छात्र संगठनों के बीच हुई बैठकों के बाद रविवार को फिर से वार्ता शुरू की गई।

इस बातचीत में विभिन्न छात्र संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वाम समर्थित छात्र संगठन AISA की पांच सदस्यीय टीम भी वार्ता में शामिल है। छात्रों को उम्मीद है कि इस दौर की बातचीत में उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है।

छात्रों की क्या हैं प्रमुख मांगें?

JPSC-JSSC Reforms Manch के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में छात्रों ने कई मांगें रखी हैं। सबसे प्रमुख मांग 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की है।

इसके अलावा छात्र सभी भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारी चाहते हैं कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

छात्रों की एक अन्य प्रमुख मांग JPSC और JSSC की परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार की है। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

आंदोलन 16वें दिन भी जारी

परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन रविवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन स्थल पर कुछ प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी हैं।

लगातार चल रहे आंदोलन के कारण सरकार पर छात्रों की मांगों के समाधान का दबाव बढ़ रहा है। दूसरी तरफ छात्र संगठन भी अपनी मांगों पर स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं।

संतोष कुमार मस्ताना को लेकर भी मांग

छात्रों की मांग केवल परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं है। आंदोलनकारी वित्त विभाग के सेक्शन ऑफिसर और कथित व्हिसलब्लोअर संतोष कुमार मस्ताना के निलंबन को वापस लेने तथा उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी कर रहे हैं।

मस्ताना को अक्टूबर 2025 में झारखंड CID ने JSSC CGL परीक्षा में पेपर लीक से जुड़ी कथित गलत जानकारी फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें झारखंड हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिली।

सरकार की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं?

सरकार की ओर से छात्रों के साथ बातचीत के लिए मंत्रियों का एक पैनल बनाया गया है। शनिवार को इस पैनल ने NSUI, JCM और आदिवासी छात्र संघ समेत अलग-अलग छात्र संगठनों के साथ बैठक की और उनकी मांगों का चार्टर मांगा।

सरकार और छात्र संगठनों के बीच लगातार हो रही बैठकों का उद्देश्य मौजूदा गतिरोध को समाप्त करना है। हालांकि, छात्रों की मुख्य मांगों पर अंतिम निर्णय क्या होगा, यह छठे दौर की बातचीत के परिणाम के बाद ही स्पष्ट होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है JPSC-JSSC विवाद?

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले हजारों अभ्यर्थियों के लिए JPSC और JSSC की परीक्षाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं। भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवाल सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े होते हैं।

छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है। वहीं सरकार के सामने चुनौती यह है कि आंदोलन का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाए और भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का भरोसा कायम किया जा सके।

अब आगे क्या होगा?

रविवार को शुरू हुई छठे दौर की वार्ता के परिणाम पर छात्रों और अभ्यर्थियों की नजर है। यदि सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच प्रमुख मांगों पर सहमति बनती है तो लंबे समय से चल रहे आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।

वहीं यदि वार्ता में कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल छात्रों की प्रमुख मांग 14वीं JPSC परीक्षा, भर्ती परीक्षाओं की जांच और JPSC-JSSC में सुधार को लेकर है।

निष्कर्ष

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। 16 दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच सरकार और छात्रों के बीच छठे दौर की बातचीत शुरू होना समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि वार्ता से छात्रों की मांगों पर क्या फैसला निकलता है।

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Manish Singh Chandel
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मनीष सिंह चन्देल रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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