JSSC Secretary CID Questioned : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रही जांच के बीच CID ने JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की है। यह कार्रवाई JSSC कार्यालय में की गई छापेमारी के बाद हुई है। जांच एजेंसी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, परीक्षा संचालन, दस्तावेजों, मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को खंगाल रही है।
इस पूरे मामले ने झारखंड की सरकारी भर्ती व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ लंबे आंदोलन के बाद सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है, वहीं दूसरी तरफ CID की कार्रवाई से जांच का दायरा लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में अभ्यर्थियों की नजर अब जांच की अगली कार्रवाई और सरकार के भर्ती सुधारों पर है।
JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से क्यों हुई पूछताछ (JSSC Secretary CID Questioned)?
CID ने 17 अगस्त 2026 को JSSC कार्यालय में छापेमारी की थी। इसके अगले दिन यानी 18 अगस्त को JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से कई घंटे पूछताछ की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह पूछताछ छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर की गई।
जांच एजेंसी भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया को समझने की कोशिश कर रही है। इसमें परीक्षा आयोजित करने से लेकर प्रश्नपत्र, अभ्यर्थियों के आवेदन, दस्तावेजों, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने तक के अलग-अलग चरण शामिल हो सकते हैं।
JSSC सचिव से पूछताछ इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आयोग राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर भर्ती परीक्षाओं का संचालन करता है।
JSSC कार्यालय में CID की छापेमारी से क्या सामने आया?
17 अगस्त को CID की टीम JSSC कार्यालय पहुंची और विभिन्न दस्तावेजों एवं रिकॉर्ड की जांच की। यह कार्रवाई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच का हिस्सा थी।
CID की कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय से चल रहा था।
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में:
- JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना
- भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच
- दोषियों पर कार्रवाई
- JPSC और JSSC में भर्ती सुधार
- परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाना
- भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था
- व्यापक जांच की मांग
शामिल रही है।
JSSC-CGL परीक्षा विवाद क्या है?
JSSC-CGL परीक्षा झारखंड की महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं में से एक रही है। सितंबर 2024 में आयोजित परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल उठाए थे।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने दावा किया था कि परीक्षा के प्रश्नपत्र के बड़े हिस्से में कथित तौर पर गड़बड़ी हुई। CID और अन्य जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले की अलग-अलग कड़ियों को जांच रही हैं।
इसी विवाद के बीच छात्रों ने रांची में लंबे समय तक आंदोलन किया। आंदोलन के दौरान JSSC और JPSC की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग लगातार उठती रही।
जांच के केंद्र में कौन-कौन से मामले हैं?
CID की जांच केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। एजेंसी विभिन्न भर्ती परीक्षाओं से संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं की जांच कर रही है।
New Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार CID ने JSSC सचिव से पूछताछ के अलावा अक्षय तिवारी और उनकी पत्नी से भी पूछताछ की है। अक्षय तिवारी, मामले में आरोपी बताए गए अभय तिवारी के भाई हैं।
अभय तिवारी को CID ने 22 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया था। वह गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में Block Supply Officer के पद पर तैनात थे।
अभय तिवारी का नाम क्यों महत्वपूर्ण है?
CID के अनुसार अभय तिवारी ने पिछले वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। जांच एजेंसी के मुताबिक उन्होंने करीब 12 प्रतियोगी परीक्षाओं में क्वालीफाई किया था।
इन परीक्षाओं में विभिन्न सरकारी और केंद्रीय संस्थानों से जुड़ी परीक्षाओं के नाम सामने आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार तिवारी ने JSSC की कुछ परीक्षाओं के अलावा JPSC की 11वीं और 13वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा भी पास की थी।
CID अब उनके candidature और selection से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
TDPL से भी जुड़ रही जांच की कड़ी
इस मामले में TSR Data Processing Pvt Ltd यानी TDPL का नाम भी सामने आया है।
रिपोर्ट के अनुसार अभय तिवारी पहले TDPL में marketing management से जुड़े कर्मचारी के रूप में काम कर चुके थे। TDPL को कुछ भर्ती परीक्षाओं के संचालन से संबंधित जिम्मेदारियां मिली थीं।
CID अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा संचालन से जुड़े विभिन्न स्तरों पर किसकी क्या भूमिका थी।
सरकार ने 18 अगस्त को JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ ही TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं और उसके जरिए प्रकाशित परिणामों को भी रद्द करने का फैसला घोषित किया था।
CID किन दस्तावेजों की जांच कर रही है?
जांच एजेंसी द्वारा अभय तिवारी की candidature से जुड़े कई रिकॉर्ड verify किए जा रहे हैं।
इनमें कथित तौर पर शामिल हैं:
- आवेदन फॉर्म
- शैक्षणिक एवं अन्य दस्तावेज
- परीक्षा रिकॉर्ड
- मूल्यांकन रिकॉर्ड
- चयन प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज
- परीक्षा संचालन एजेंसी के रिकॉर्ड
- उम्मीदवार से संबंधित अन्य जानकारी
CID यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग परीक्षाओं में आवेदन से लेकर चयन तक की प्रक्रिया किस तरह हुई।
‘रेट चार्ट’ के आरोपों की भी जांच
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अभय तिवारी ने पूछताछ के दौरान अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन के लिए कथित “रेट चार्ट” इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी। रिपोर्ट में कथित रकम ₹2 लाख से ₹70 लाख तक बताए जाने का उल्लेख है।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये जांच के दौरान सामने आए आरोप/बयान हैं। इनके आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
JSSC-CGL रद्द होने के बाद बढ़ी जांच की अहमियत
झारखंड सरकार ने छात्रों के लंबे आंदोलन के बीच JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
इसके साथ ही TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं और उसके माध्यम से प्रकाशित परिणामों को भी रद्द करने की घोषणा हुई।
इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि:
भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितता की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी?
इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए CID की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
44 भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी बड़ा फैसला
हालिया घटनाक्रम में झारखंड सरकार ने JPSC, JSSC और outsourced agency से जुड़ी कई भर्ती परीक्षाओं पर कार्रवाई की है। रिपोर्टों के अनुसार कुल 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में रद्द परीक्षाओं और जांच के दायरे को लेकर अलग-अलग संख्या/वर्गीकरण सामने आया है। इसलिए अभ्यर्थियों को अंतिम सूची के लिए संबंधित सरकारी अधिसूचना को ही आधार मानना चाहिए।
इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों और पहले से चयनित उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों की चिंता भी बढ़ी
JSSC-CGL और दूसरी परीक्षाओं के रद्द होने के बाद उन उम्मीदवारों के सामने भी समस्या खड़ी हुई है, जिन्होंने परीक्षा पास करके नौकरी हासिल कर ली थी।
इन अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर किसी परीक्षा में अनियमितता हुई भी है तो सभी सफल उम्मीदवारों को जिम्मेदार नहीं माना जाना चाहिए।
दूसरी तरफ सरकार और जांच एजेंसियों के सामने परीक्षा की निष्पक्षता और पूरी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने की चुनौती है।
इस कारण आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी।
छात्रों के आंदोलन का क्या असर पड़ा?
JPSC-JSSC भर्ती विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन करीब एक महीने तक चला। आंदोलनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की।
सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने समेत कई मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद छात्रों ने आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया है। छात्रों ने सरकार को दो महीने का समय भी दिया है।
इसके बाद रांची में छात्रों ने आभार यात्रा भी निकाली और सरकार के फैसले का स्वागत किया।
अब CID की जांच से क्या उम्मीद?
CID की जांच से अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
जांच के दौरान यह देखा जा सकता है कि:
- प्रश्नपत्र से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी?
- परीक्षा संचालन में किन संस्थाओं की भूमिका थी?
- outsourced agency की निगरानी कैसे हुई?
- परीक्षा रिकॉर्ड में कोई असामान्यता थी या नहीं?
- चयन प्रक्रिया में किसी तरह का अनुचित हस्तक्षेप हुआ या नहीं?
- किन लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है?
- क्या किसी उम्मीदवार को अनुचित लाभ मिला?
- क्या अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद अधिक स्पष्ट होंगे।
JSSC सचिव से पूछताछ क्यों महत्वपूर्ण है?
JSSC सचिव आयोग की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण पद पर होते हैं। इसलिए भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया और आयोग के कामकाज से संबंधित जानकारी के लिए उनसे पूछताछ जांच का अहम हिस्सा मानी जा सकती है।
लेकिन केवल किसी अधिकारी से पूछताछ होने का अर्थ यह नहीं है कि वह अधिकारी आरोपी या दोषी है।
पूछताछ जांच प्रक्रिया का हिस्सा है, और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
JSSC भर्ती व्यवस्था में क्या सुधार जरूरी?
हालिया विवाद के बाद झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर कई सुधारों की जरूरत महसूस की जा रही है।
प्रश्नपत्र सुरक्षा
Question paper की printing, transportation और storage में multi-layer security जरूरी है।
डिजिटल सुरक्षा
Online examination और digital evaluation में मजबूत cybersecurity व्यवस्था होनी चाहिए।
CCTV निगरानी
परीक्षा केंद्रों पर CCTV monitoring और secure data storage की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए।
Third-party agency की जवाबदेही
अगर किसी private agency को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी दी जाती है तो उसकी जिम्मेदारी और monitoring स्पष्ट होनी चाहिए।
शिकायत निवारण
अभ्यर्थियों के लिए transparent और time-bound grievance system होना चाहिए।
Result Audit
परिणाम जारी होने से पहले independent technical और procedural audit की व्यवस्था की जा सकती है।
झारखंड के अभ्यर्थियों के लिए आगे क्या?
JPSC और JSSC की आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह समय काफी महत्वपूर्ण है।
अभ्यर्थियों को:
- JPSC की official notification देखते रहना चाहिए।
- JSSC की official notification जांचनी चाहिए।
- परीक्षा की नई तारीखों का इंतजार करना चाहिए।
- पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को final information न मानें।
- admit card और result केवल official portal से डाउनलोड करें।
- किसी भी संदिग्ध recruitment claim की जानकारी संबंधित विभाग को दें।
JSSC-CID Investigation 2026: एक नजर में
| मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| जांच एजेंसी | CID, Jharkhand |
| मुख्य मामला | भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितता |
| JSSC सचिव | सुधीर गुप्ता |
| कार्रवाई | पूछताछ |
| JSSC कार्यालय पर कार्रवाई | 17 अगस्त 2026 |
| सचिव से पूछताछ | 18 अगस्त 2026 |
| प्रमुख आरोपी के रूप में जांच में नाम | अभय तिवारी |
| अभय तिवारी की गिरफ्तारी | 22 जुलाई 2026 |
| संबंधित agency | TDPL |
| JSSC-CGL | सरकार ने रद्द किया |
| छात्र आंदोलन | फिलहाल स्थगित |
| छात्रों का अल्टीमेटम | 2 महीने |
Official Websites
JSSC Official Website:
Jharkhand Staff Selection Commission
JPSC Official Website:
Jharkhand Public Service Commission
अभ्यर्थियों को नई परीक्षा तारीख, भर्ती नोटिफिकेशन, आवेदन, एडमिट कार्ड और रिजल्ट के लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
JSSC सचिव से CID ने क्यों पूछताछ की?
CID ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत JSSC सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की। यह पूछताछ JSSC कार्यालय में छापेमारी के बाद की गई।
JSSC कार्यालय पर CID ने कब छापा था?
CID ने 17 अगस्त 2026 को JSSC कार्यालय में छापेमारी की थी।
JSSC सचिव का नाम क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार JSSC सचिव का नाम सुधीर गुप्ता है।
क्या JSSC सचिव आरोपी हैं?
सिर्फ पूछताछ के आधार पर किसी अधिकारी को आरोपी या दोषी नहीं माना जा सकता। CID द्वारा पूछताछ जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्ष और कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।
अभय तिवारी कौन हैं?
अभय तिवारी गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में Block Supply Officer के रूप में पदस्थ थे और भर्ती परीक्षा अनियमितता मामले में CID द्वारा गिरफ्तार किए गए हैं।
TDPL क्या है?
TSR Data Processing Pvt Ltd (TDPL) एक outsourced agency थी, जिसे कुछ भर्ती परीक्षाओं से संबंधित कार्य सौंपे गए थे। जांच में इसकी भूमिका से जुड़े रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हैं।
क्या JSSC-CGL परीक्षा रद्द हो गई है?
हां। झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की है। इसके साथ TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उसके माध्यम से प्रकाशित परिणामों को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया।
क्या छात्रों का आंदोलन खत्म हो गया?
छात्रों ने आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया है और सरकार को दो महीने का समय दिया है।
निष्कर्ष
झारखंड में JSSC भर्ती परीक्षा अनियमितता मामले की जांच अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। JSSC कार्यालय पर CID की छापेमारी के बाद सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ हुई है। जांच एजेंसी भर्ती परीक्षाओं से जुड़े दस्तावेज, आवेदन, मूल्यांकन और चयन प्रक्रिया के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
मामले में अभय तिवारी की भूमिका भी जांच के केंद्र में है। CID के अनुसार वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए थे और TDPL से भी जुड़े रहे थे। जांच एजेंसी उनके candidature और चयन प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड को verify कर रही है।
वहीं, सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद छात्रों के आंदोलन को फिलहाल विराम मिला है। छात्रों ने सरकार को दो महीने का समय दिया है और भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग जारी रखी है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि CID की जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और सरकार भविष्य की JPSC-JSSC परीक्षाओं को किस तरह अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाती है। साथ ही पहले से चयनित अभ्यर्थियों के हितों को लेकर भी सरकार के अगले कदम पर सबकी नजर रहेगी।
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