असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) द्वारा असम में 21 उम्मीदवारों की घोषणा के बाद कांग्रेस ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने जहां गठबंधन की संभावनाओं का जिक्र किया, वहीं JMM के इस कदम पर चिंता भी जताई है।यह मामला अब केवल असम चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि झारखंड की राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
JMM ने 21 उम्मीदवारों का किया ऐलान
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम विधानसभा चुनाव के लिए 21 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। पार्टी के महासचिव विनोद कुमार पांडे ने बताया कि उम्मीदवारों का चयन पार्टी स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद किया गया है।JMM का यह फैसला इस बात का संकेत देता है कि पार्टी असम में अपनी राजनीतिक उपस्थिति मजबूत करना चाहती है और स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार है।126 सदस्यीय असम विधानसभा के चुनाव में 21 सीटों पर उम्मीदवार उतारना JMM की रणनीति को दर्शाता है, जिसमें पार्टी आदिवासी और अन्य वर्गों के बीच अपनी पकड़ बनाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस ने जताई नाराजगी और चिंता
JMM के इस फैसले पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने असम चुनाव में JMM के साथ गठबंधन को लेकर गंभीर और सकारात्मक पहल की थी।उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने JMM को 5 से 7 सीटों का प्रस्ताव दिया था और यह भरोसा भी दिलाया था कि जिन सीटों पर JMM चुनाव लड़ेगी, वहां कांग्रेस का पूरा संगठनात्मक समर्थन दिया जाएगा।कांग्रेस का कहना है कि उसका उद्देश्य था कि JMM के प्रतिनिधि असम विधानसभा तक पहुंचें और गठबंधन के माध्यम से मजबूत राजनीतिक उपस्थिति बनाई जाए।
JMM ने असम चुनाव के लिए घोषित किए 21 उम्मीदवार
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) द्वारा जारी सूची के अनुसार असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए निम्नलिखित 21 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए गए हैं—
- 47, Mazbat – Priti Rekha Barla
- 70, Biswanath – Teharu Gour
- 106, Khumtai – Amit Nag
- 87, Chabua – Bhuben Murari
- 01, Gossaingaon – Phedricson Hasda
- 93, Sonari – Baldev Teli
- 90, Duliajan – Peter Minj
- 74, Rongonadi – Paban Sautal
- 84, Digboi – Bharat Nayak
- 45, Bhergaon – Prabhat Das Panika
- 91, Tingkhong – Mahabir Baske
- 66, Barchalla – Abdul Mazan
- 68, Rangapara – Mathew Topno
- 83, Margherita – Jernal Minj
- 92, Naharkatia – Sanjay Bagh
- 85, Makum – Muna Karmakar
- 82, Doomdooma – Ratnakar Tati
- 107, Sarupathar – Sahil Munda
- 102, Titabor – Ms Sonia
- 108, Bokajan (ST) – Pratapching Rangphar
- 89, Khowang – Prabhakar Das
गठबंधन की कोशिश क्यों नहीं बनी सफल
कांग्रेस के अनुसार, उसने JMM के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कोशिश की, लेकिन JMM ने स्थानीय दलों के समर्थन के आधार पर 21 सीटों पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे और रणनीति को लेकर सहमति नहीं बन पाई।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय दल अक्सर अपने विस्तार के लिए स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने को प्राथमिकता देते हैं, जिससे वे अपनी पहचान मजबूत कर सकें।
आदिवासी वोट बैंक को लेकर चिंता
कांग्रेस ने अपने बयान में सबसे बड़ी चिंता आदिवासी वोट बैंक को लेकर जताई है।केशव महतो कमलेश ने कहा कि JMM का यह फैसला आदिवासी वोटों के बंटवारे का कारण बन सकता है। इससे उनकी एकजुट राजनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है।असम के कई इलाकों में आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि समान विचारधारा वाले दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं, तो इसका सीधा फायदा विरोधी दलों को मिल सकता है।
कांग्रेस ने परिणामों पर टिप्पणी से किया परहेज
कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि वह JMM के चुनावी परिणामों को लेकर कोई अनुमान नहीं लगाना चाहती।हालांकि, पार्टी ने यह जरूर कहा कि JMM के इस फैसले के प्रभाव को लेकर उसे चिंता है।यह बयान इस बात का संकेत देता है कि कांग्रेस अभी भी इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाना चाहती है और खुलकर टकराव की स्थिति से बचना चाहती है।
JMM की रणनीति: विस्तार की ओर कदम
JMM का असम में 21 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला उसकी विस्तारवादी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।झारखंड में मजबूत आधार रखने वाली यह पार्टी अब अन्य राज्यों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है।असम में आदिवासी समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है, जिसे ध्यान में रखते हुए JMM ने यहां चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय राजनीति
यह मामला क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के बीच रणनीतिक अंतर को भी दर्शाता है।जहां कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल गठबंधन के माध्यम से चुनावी मजबूती हासिल करना चाहते हैं, वहीं क्षेत्रीय दल अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने के लिए अकेले चुनाव लड़ने को प्राथमिकता देते हैं।JMM का यह फैसला भी इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
झारखंड की राजनीति पर भी असर संभव
हालांकि यह मामला असम विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, लेकिन इसका असर झारखंड की राजनीति पर भी पड़ सकता है।झारखंड में JMM और कांग्रेस एक साथ सरकार चला रहे हैं। ऐसे में असम चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद भविष्य में राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।हालांकि अभी तक दोनों दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को सीमित रखने की कोशिश की है।
सियासी समीकरण और भविष्य
असम विधानसभा चुनाव में JMM का प्रदर्शन यह तय करेगा कि पार्टी की रणनीति कितनी सफल रही।यदि JMM अच्छा प्रदर्शन करती है, तो यह उसके विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। वहीं, यदि परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते हैं, तो गठबंधन से अलग चुनाव लड़ने के फैसले पर सवाल उठ सकते हैं।कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसे यह देखना होगा कि बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने का क्या असर पड़ता है।
निष्कर्ष
असम विधानसभा चुनाव को लेकर JMM और कांग्रेस के बीच उभरा यह मतभेद भारतीय राजनीति की जटिलता को दर्शाता है।जहां एक ओर कांग्रेस गठबंधन की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती थी, वहीं JMM ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।अब नजरें चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि किसकी रणनीति ज्यादा सफल रही।फिलहाल, यह साफ है कि इस फैसले ने सियासी हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले समय में इसके प्रभाव दूर तक देखने को मिल सकते हैं।




