देवघर में पुलिस थाने के पास ही बिक रही महुआ शराब, आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खुला खेल | Jharkhand News | Bhayajii News

महुआ शराब | Jharkhand News | Bhaiyajii News

झारखंड के देवघर जिले से सामने आई एक चौंकाने वाली तस्वीर ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर प्रशासन अवैध शराब के खिलाफ सख्ती का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर नगर थाना क्षेत्र के बेहद करीब खुलेआम महुआ शराब की बिक्री हो रही है। हैरानी की बात यह है कि यह अवैध कारोबार पुलिस स्टेशन से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर बेखौफ तरीके से चल रहा है।यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह अवैध गतिविधियां प्रशासन की नजरों के सामने ही फल-फूल रही हैं।

कहां हो रहा है यह अवैध कारोबार?

देवघर नगर थाना क्षेत्र के आरएल सर्राफ स्कूल के पास सड़क किनारे खुलेआम महुआ शराब की बिक्री की जा रही है। यह इलाका काफी व्यस्त माना जाता है, जहां दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह जगह नगर थाना से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।इसके बावजूद, यहां रोजाना सुबह से शाम तक शराब का कारोबार जारी रहता है, जिससे यह सवाल उठता है कि आखिर पुलिस और प्रशासन की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ रही।

सुबह से शाम तक चलता है धंधा

रिपोर्ट के अनुसार, यह अवैध कारोबार सुबह करीब 10 बजे से शुरू होकर शाम 5 बजे तक चलता है।इस दौरान:

  • सड़क किनारे खुलेआम शराब बेची जाती है
  • लोग वहीं बैठकर शराब का सेवन करते हैं
  • कई लोग डिब्बों में शराब लेकर जाते भी देखे जाते हैं

यह सब कुछ दिन के उजाले में हो रहा है, जिससे यह साफ है कि तस्करों को किसी तरह का डर नहीं है।

स्कूली बच्चों पर पड़ रहा असर

जिस जगह यह अवैध शराब बिक रही है, उसके पास ही स्कूल स्थित है। दोपहर के समय बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं। ऐसे माहौल में बच्चों के सामने इस तरह की गतिविधियां होना बेहद चिंताजनक है। इससे न केवल सामाजिक वातावरण खराब होता है, बल्कि बच्चों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

प्रशासनिक गाड़ियां भी गुजरती हैं, फिर भी कार्रवाई नहीं

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रास्ते से प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस की गाड़ियां भी नियमित रूप से गुजरती हैं। इसके बावजूद अवैध शराब की बिक्री पर कोई रोक नहीं लगाई जा रही है।यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या यह लापरवाही है या जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

स्थानीय लोगों में नाराजगी

इस अवैध कारोबार से आसपास के लोग काफी परेशान हैं। उन्होंने कई बार इसकी शिकायत उत्पाद विभाग और प्रशासन से की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि:

  • शराबियों के कारण माहौल खराब हो रहा है
  • महिलाओं और बच्चों को असुरक्षा महसूस होती है
  • क्षेत्र की छवि खराब हो रही है

इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

यह कोई पहला मामला नहीं

देवघर और आसपास के इलाकों में अवैध महुआ शराब का कारोबार पहले भी सामने आता रहा है।पहले भी उत्पाद विभाग ने कई जगहों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त की है और भट्ठियों को नष्ट किया है।इससे यह साफ होता है कि यह समस्या नई नहीं है, बल्कि लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि, लगातार कार्रवाई के बावजूद यह धंधा पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है।

प्रशासन की जिम्मेदारी और सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध गतिविधि पुलिस स्टेशन के इतने करीब हो रही है, तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

संभावित कारण:

  • निगरानी में कमी
  • स्थानीय स्तर पर लापरवाही
  • संगठित नेटवर्क की मौजूदगी

यह भी संभव है कि इस अवैध कारोबार के पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो, जो खुलेआम कानून को चुनौती दे रहा है।

कानून व्यवस्था पर असर

अवैध शराब का कारोबार केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे कई सामाजिक समस्याएं भी जुड़ी होती हैं:

  • अपराध में बढ़ोतरी
  • स्वास्थ्य संबंधी खतरे
  • सामाजिक अस्थिरता

ऐसे में इस पर नियंत्रण करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

क्या होनी चाहिए कार्रवाई?

इस तरह के मामलों में प्रशासन को तत्काल कदम उठाने की जरूरत है:

  • नियमित छापेमारी अभियान
  • दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
  • स्थानीय पुलिस की जवाबदेही तय करना
  • जनता की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई

साथ ही, यह भी जरूरी है कि इस तरह के अवैध धंधों को जड़ से खत्म करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाई जाए।

निष्कर्ष

देवघर में पुलिस थाने के पास खुलेआम महुआ शराब की बिक्री एक गंभीर चिंता का विषय है। यह न केवल कानून व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि प्रशासनिक तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है।यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या स्थानीय लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं।

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