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जादूगोड़ा स्कूल में 700 छात्रों पर सिर्फ 9 शिक्षक, इंटर स्तर पर नहीं है एक भी शिक्षक | Jharkhand News | Bhaiyajii News |

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जादूगोड़ा स्कूल शिक्षक संकट : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा स्थित उन्नत उच्च विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। करीब 700 छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय में वर्तमान में केवल 9 शिक्षक कार्यरत हैं। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि इंटरमीडिएट स्तर की पढ़ाई के लिए एक भी शिक्षक की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

विद्यालय में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही

जादूगोड़ा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैकड़ों विद्यार्थी इस विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करते हैं। विद्यालय को उन्नत उच्च विद्यालय का दर्जा मिलने के बाद यहां नामांकन की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्तमान में कक्षा 6 से लेकर इंटरमीडिएट तक लगभग 700 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।

हालांकि छात्रों की संख्या बढ़ने के बावजूद शिक्षकों की नियुक्ति उसी अनुपात में नहीं हो पाई है। परिणामस्वरूप शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

इंटर स्तर के लिए शिक्षक नहीं, छात्रों की बढ़ी परेशानी

विद्यालय में इंटरमीडिएट की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन यहां इंटर स्तर के लिए एक भी विषय विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं है। विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय के विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं नहीं मिल पा रही हैं।

कई छात्रों का कहना है कि उन्हें परीक्षा की तैयारी स्वयं करनी पड़ रही है। कुछ विद्यार्थी निजी ट्यूशन का सहारा लेने को मजबूर हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह संभव नहीं है। ऐसे में सरकारी विद्यालयों पर निर्भर विद्यार्थियों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हो रही है।

एक शिक्षक को संभालनी पड़ रही कई जिम्मेदारियां

विद्यालय में कार्यरत 9 शिक्षक सभी कक्षाओं और विषयों को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षकों को कई बार अपने विषय के अलावा अन्य विषयों की भी कक्षाएं लेनी पड़ती हैं।

इस स्थिति के कारण—

  • नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो पा रही हैं।
  • विषयवार पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
  • विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा।
  • बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कमजोर हो रही है।
  • इंटरमीडिएट छात्रों को विशेषज्ञ शिक्षकों का लाभ नहीं मिल रहा।

शिक्षकों पर बढ़ते कार्यभार का असर शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।

ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र के छात्रों पर सबसे अधिक असर

जादूगोड़ा क्षेत्र में बड़ी संख्या में ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के लोग रहते हैं। यहां के अधिकांश परिवार सरकारी विद्यालयों पर निर्भर हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कई अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में नहीं भेज सकते।

ऐसे में यदि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी रहती है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी से विद्यार्थियों की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता की संभावना भी प्रभावित हो सकती है।

अभिभावकों ने उठाई नियुक्ति की मांग

विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि सरकार ने विद्यालय को उन्नत उच्च विद्यालय का दर्जा तो दे दिया, लेकिन आवश्यक संसाधनों और शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई।

अभिभावकों का कहना है कि केवल भवन निर्माण या नाम परिवर्तन से शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं होती। छात्रों को बेहतर शिक्षा देने के लिए पर्याप्त और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य है।

स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से रिक्त पदों को जल्द भरने की मांग की है।

शिक्षा के अधिकार पर उठ रहे सवाल

भारत का संविधान और शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की बात करता है। लेकिन जब किसी विद्यालय में छात्रों की संख्या अधिक और शिक्षकों की संख्या बेहद कम हो, तो शिक्षा के अधिकार की वास्तविक स्थिति पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित होना चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शिक्षण व्यवस्था पर जोर देती है।

झारखंड में शिक्षक बहाली की आवश्यकता

जादूगोड़ा की समस्या राज्य के अन्य कई सरकारी विद्यालयों की स्थिति को भी उजागर करती है। झारखंड के अनेक स्कूल वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।

शिक्षा विभाग समय-समय पर नियुक्ति प्रक्रियाएं शुरू करता है, लेकिन रिक्त पदों की संख्या अब भी अधिक है। यदि राज्य सरकार स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति तेज करती है तो इससे शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार संभव है।

विशेष रूप से इंटरमीडिएट स्तर के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है ताकि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर आधार मिल सके।

स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें

जादूगोड़ा क्षेत्र के लोगों ने सरकार और शिक्षा विभाग से निम्नलिखित मांगें रखी हैं—

  • इंटरमीडिएट स्तर के लिए तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति।
  • रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरना।
  • विज्ञान और गणित विषय के विशेषज्ञ शिक्षकों की तैनाती।
  • विद्यालय में नियमित शैक्षणिक निरीक्षण।
  • छात्रों के लिए अतिरिक्त शैक्षणिक सहायता कार्यक्रम शुरू करना।
  • छात्र-शिक्षक अनुपात को संतुलित बनाना।

निष्कर्ष

पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा स्थित उन्नत उच्च विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है। लगभग 700 विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल 9 शिक्षकों के भरोसे चल रही है, जबकि इंटरमीडिएट स्तर पर एक भी शिक्षक उपलब्ध नहीं है।

यदि जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो इसका असर विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन और भविष्य पर पड़ सकता है। सरकार और शिक्षा विभाग को इस समस्या का त्वरित समाधान निकालते हुए आवश्यक शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार मिल सके और क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके।

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