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‘मन की बात’ नहीं, यह ‘मन की सत्ता’ का प्रचार है : सतीश पौल मुंजनी| Jharkhand News | Bhaiyajii News

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भाजपा जनता की समस्याओं से ध्यान भटकाने का कर रही प्रयास – कांग्रेस
मन की सत्ता प्रचार कार्यक्रम :भारतीय जनता पार्टी द्वारा 25 जनवरी को प्रस्तावित मन की बात कार्यक्रम को लेकर झारखंड की राजनीति गरमा गई है। भाजपा द्वारा इसे “जन-जन का कार्यक्रम” बताए जाने पर कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने इसे जनता से जुड़ाव का माध्यम नहीं, बल्कि “मन की सत्ता” का सुनियोजित प्रचार कार्यक्रम करार दिया है।

सतीश पौल मुंजनी ने रांची में जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा जिस कार्यक्रम को जनसंवाद बताकर प्रस्तुत कर रही है, वह वास्तव में देश की जनता की असली समस्याओं से ध्यान भटकाने का एक माध्यम बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि मन की बात एकतरफा संवाद है, जिसमें जनता को केवल सुनने के लिए मजबूर किया जाता है, बोलने या सवाल पूछने का कोई अधिकार नहीं दिया जाता।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नियमित रूप से मन की बात में देश को संबोधित करते हैं, लेकिन जनता की बात सुनने का साहस नहीं दिखाते। आज तक प्रधानमंत्री ने खुली प्रेस वार्ता कर महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली, युवाओं के भविष्य, शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था की जर्जर हालत जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सवालों का सामना नहीं किया है।

जमीनी मुद्दों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी

सतीश पौल मुंजनी ने कहा कि देश आज गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट से गुजर रहा है। महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है, बेरोजगारी ऐतिहासिक स्तर पर है, किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन इन मुद्दों पर मन की बात में कोई ठोस जवाब नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भाषणों के जरिए भावनात्मक मुद्दे उठाकर असली सवालों से बचने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की हालत बदतर हो चुकी है। मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल रही, काम के दिन घटाए जा रहे हैं, लेकिन इस पर प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली किसी से छिपी नहीं है, फिर भी सरकार आत्ममंथन करने के बजाय आत्मप्रचार में व्यस्त है।

झारखंड के साथ हो रहा अन्याय

मुंजनी ने विशेष रूप से झारखंड का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद बेरोजगारी और पलायन का दंश झेल रहा है। जल, जंगल और जमीन पर सबसे ज्यादा हमले भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के गुमनाम नायकों और आदिवासी विरासत का उल्लेख केवल भाषणों तक सीमित है, जबकि हकीकत में आदिवासियों के अधिकारों को लगातार कमजोर किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पर झारखंड का भारी बकाया है, जिसे जानबूझकर रोका जा रहा है। इसका सीधा असर राज्य की विकास योजनाओं और आम जनता पर पड़ रहा है। मुंजनी ने कहा कि यह जिम्मेदारी भाजपा की केंद्र सरकार की है, लेकिन जवाबदेही लेने के बजाय प्रचार अभियानों के जरिए सच्चाई छुपाने की कोशिश की जा रही है।

सवालों से क्यों बचती है भाजपा?

सतीश पौल मुंजनी ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि अगर मन की बात सच में जन-जन का कार्यक्रम है, तो प्रधानमंत्री जनता से सीधे सवाल क्यों नहीं लेते?
उन्होंने पूछा—

  • महंगाई पर आम जनता से खुली बातचीत क्यों नहीं होती?
  • किसानों से MSP की कानूनी गारंटी पर सवाल क्यों नहीं लिए जाते?
  • युवाओं से रोजगार पर सीधा संवाद क्यों नहीं किया जाता?
  • आदिवासियों से सरना धर्म कोड और वनाधिकार कानून पर चर्चा क्यों नहीं होती?

उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इन सवालों का सामना नहीं करेगी, तब तक मन की बात को जनसंवाद कहना जनता की बुद्धि का अपमान है।

भाषण नहीं, समाधान चाहती है जनता

मुंजनी ने स्पष्ट कहा कि भाजपा संगठनात्मक बैठकों और प्रचार अभियानों से सच्चाई नहीं छुपा सकती। आज देश की जनता भाषण नहीं, ठोस समाधान चाहती है। मन की बात के शोर में जनता की कराह को दबाया नहीं जा सकता।

उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस झारखंड और देश की जनता की वास्तविक समस्याओं को सड़क से सदन तक उठाती रहेगी। जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए कांग्रेस हर मोर्चे पर खड़ी रहेगी।

अंत में उन्होंने कहा कि मन की बात अगर सच में लोकतांत्रिक संवाद का मंच बनना चाहता है, तो उसे सत्ता की बात से आगे बढ़कर जनता की बात सुननी होगी, वरना यह कार्यक्रम केवल सत्ता के प्रचार का प्रतीक बनकर रह जाएगा।

— सतीश पौल मुंजनी
चेयरमैन, मीडिया विभाग
झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी

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Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
Manish Singh Chandel रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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