पंचायत फंड झारखंड : झारखंड की राजनीति में पंचायत फंड को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोलते हुए उसके आरोपों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और सस्ती राजनीति करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा का मकसद पंचायतों का विकास नहीं, बल्कि जनता को भ्रमित कर राजनीतिक लाभ लेना है।
पंचायत फंड पर भाजपा के आरोपों को बताया आधारहीन
रांची में जारी प्रेस विज्ञप्ति में सतीश पौल मुंजनी ने कहा कि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों से परे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा लगातार बिना प्रमाण के आरोप लगाकर राजनीतिक माहौल को खराब करने की कोशिश कर रही है। मुंजनी ने कहा कि पंचायतों के विकास के लिए जो फंड केंद्र सरकार से राज्यों को मिलता है, वह कोई एहसान नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार है। इसे प्रधानमंत्री की “दूरदर्शिता” बताना पूरी तरह गलत है और जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
केंद्र का फंड झारखंड का अधिकार, कोई उपकार नहीं
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट कहा कि केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को मिलने वाला फंड एक तय प्रक्रिया के तहत आता है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इसे अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि यह हर राज्य का वैधानिक हिस्सा होता है।उन्होंने कहा कि झारखंड को मिलने वाला पंचायत फंड राज्य के अधिकारों के तहत आता है और इसे किसी भी तरह से केंद्र का “उपकार” बताना पूरी तरह भ्रामक है। यह बयान केवल राजनीतिक फायदे के लिए दिया जा रहा है।
भाजपा पर लगाया कट-कमीशन और भ्रष्टाचार का आरोप
सतीश पौल मुंजनी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि कट-कमीशन और भ्रष्टाचार की राजनीति की शुरुआत भाजपा ने ही की है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कई भाजपा शासित राज्यों में योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं।उन्होंने कहा कि आवास योजनाओं, जल जीवन मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोप भाजपा सरकारों पर लगे हैं। ऐसे में भाजपा का झारखंड सरकार पर आरोप लगाना केवल अपनी विफलताओं को छिपाने की कोशिश है।
पंचायत प्रतिनिधियों को भड़काने का आरोप
कांग्रेस ने भाजपा पर पंचायत प्रतिनिधियों को राज्य सरकार के खिलाफ भड़काने का भी आरोप लगाया है। मुंजनी ने कहा कि भाजपा की यह पुरानी रणनीति रही है कि वह विकास कार्यों को बाधित कर राजनीतिक माहौल को अस्थिर बनाए।उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को उकसाना यह दर्शाता है कि पार्टी विकास नहीं बल्कि अराजकता फैलाना चाहती है। इससे न केवल प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होता है, बल्कि आम जनता को भी नुकसान उठाना पड़ता है।
बिना सबूत आरोप लगाने की राजनीति
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा वर्षों से एक ही तरह के आरोप दोहराती रही है—कट-कमीशन, भ्रष्टाचार और घोटाले। लेकिन आज तक भाजपा इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है।उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के आरोप लगाना भाजपा की राजनीति का हिस्सा बन गया है। इससे न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है, बल्कि जनता का भरोसा भी कमजोर होता है।
कांग्रेस का जवाब: पारदर्शिता और विकास हमारी प्राथमिकता
सतीश पौल मुंजनी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी पंचायत विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पंचायतों के लिए आने वाले हर रुपये का उपयोग पारदर्शी तरीके से किया जाएगा और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं और पंचायत सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है। भाजपा चाहे जितनी भी राजनीति कर ले, लेकिन राज्य का विकास रुकने वाला नहीं है।
झारखंड की राजनीति में बढ़ता टकराव
पंचायत फंड को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच यह विवाद झारखंड की राजनीति में बढ़ते टकराव को दर्शाता है। जहां एक तरफ भाजपा राज्य सरकार पर आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है, खासकर पंचायत और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर।
निष्कर्ष
पंचायत फंड को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल चुका है। कांग्रेस जहां भाजपा पर झूठ और भ्रम फैलाने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है।ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इस राजनीतिक खींचतान के बीच पंचायतों का वास्तविक विकास प्रभावित होगा या फिर यह केवल सियासी बयानबाजी तक सीमित रहेगा।




