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रांची रेलवे स्टेशन पर बड़ा खुलासा 61 किलो गांजा के साथ पकड़े गए 3 युवक, आखिर कहां जा रही थी करोड़ों की खेप? | Jharkhand News | Bhaiyajii News

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Ranchi News : झारखंड की राजधानी रांची में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने नशा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 61 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। इस दौरान बिहार के तीन युवकों को गिरफ्तार किया गया। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 30.50 लाख रुपये बताई जा रही है। यह कार्रवाई आरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन नार्कोस’ के तहत की गई।

इस बड़ी बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई हैं। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे गांजा ओडिशा के संबलपुर क्षेत्र से लेकर बिहार जा रहे थे। इस खुलासे के बाद अंतरराज्यीय नशा तस्करी के एक बड़े गिरोह की आशंका जताई जा रही है।

ऑपरेशन नार्कोस के तहत हुई कार्रवाई

आरपीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि संबलपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस में कुछ लोग बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ लेकर यात्रा कर रहे हैं। सूचना के आधार पर रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू की गई। जांच के दौरान संदिग्ध युवकों को ट्रेन के एक कोच में कई बैगों के साथ देखा गया।

सुरक्षा कर्मियों ने जब उनसे पूछताछ की और बैगों की तलाशी ली तो उसमें बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। तलाशी के दौरान कुल 61 पैकेट मिले, जिनमें प्रत्येक में लगभग एक किलोग्राम गांजा भरा हुआ था। इसके बाद तीनों आरोपियों को तत्काल हिरासत में ले लिया गया।

बिहार के रहने वाले हैं तीनों आरोपी

गिरफ्तार किए गए युवकों की पहचान आयुष सिंह (22), प्रिंस कुमार (21) और अंकित पाठक (19) के रूप में हुई है। तीनों बिहार के बक्सर जिले के निवासी बताए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या ये पहली बार इस तस्करी में शामिल हुए थे या पहले भी ऐसे मामलों में सक्रिय रहे हैं।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने गांजा ओडिशा के संबलपुर इलाके से प्राप्त किया था और उसे बिहार पहुंचाने की योजना थी। सुरक्षा एजेंसियां अब सप्लाई चेन और खरीददारों की पहचान करने में जुटी हुई हैं।

रेलवे स्टेशन बना तस्करों का ट्रांजिट प्वाइंट

पिछले कुछ वर्षों में रेलवे नेटवर्क का उपयोग नशा तस्करी के लिए बढ़ता देखा गया है। लंबी दूरी की ट्रेनों में बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के कई मामले सामने आए हैं।

रांची रेलवे स्टेशन भी पूर्व में ऐसे मामलों का केंद्र रहा है। मई 2026 में भी आरपीएफ ने स्टेशन पर एक ट्रेन से 13 किलोग्राम गांजा बरामद किया था। लगातार हो रही बरामदगियां यह संकेत देती हैं कि तस्कर रेलवे मार्ग को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानकर उसका उपयोग कर रहे हैं।

झारखंड में नशा तस्करी पर बढ़ी चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड पूर्वी भारत के कई राज्यों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। यही कारण है कि नशा तस्कर राज्य के विभिन्न रेलवे और सड़क मार्गों का इस्तेमाल करते हैं।

हाल के वर्षों में गांजा, ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां लगातार कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन इसके बावजूद नशा कारोबार पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाया है।

युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

नशा तस्करी के मामलों में सबसे बड़ी चिंता युवाओं की बढ़ती भागीदारी है। गिरफ्तार तीनों आरोपी 19 से 22 वर्ष की आयु वर्ग के हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तस्कर गिरोह अक्सर कम उम्र के युवाओं को लालच देकर इस कारोबार में शामिल कर लेते हैं।

कई मामलों में बेरोजगारी, जल्दी पैसा कमाने की चाह और गलत संगत युवाओं को अपराध की ओर धकेल देती है। यही कारण है कि सामाजिक संगठनों और प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

कानूनी कार्रवाई शुरू

आरपीएफ ने तीनों आरोपियों और जब्त गांजे को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के हवाले कर दिया है। अब एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों के संपर्क किन लोगों से थे और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हैं। मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

नशा कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान

भारतीय रेलवे और आरपीएफ देशभर में नशा तस्करी रोकने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं। ‘ऑपरेशन नार्कोस’ के तहत रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में नियमित जांच की जा रही है। कई राज्यों में इस अभियान के दौरान बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए हैं।

अधिकारियों का कहना है कि रेलवे नेटवर्क का दुरुपयोग रोकने के लिए तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचना तंत्र और विशेष जांच टीमों की मदद ली जा रही है।

समाज के लिए खतरा बनता नशा

विशेषज्ञों का मानना है कि नशा तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौती भी है। मादक पदार्थों की आसान उपलब्धता युवाओं के भविष्य को प्रभावित करती है और अपराध दर को बढ़ाने में भी भूमिका निभाती है।

इसी कारण सरकार और एजेंसियां नशा मुक्त समाज के लक्ष्य को लेकर लगातार अभियान चला रही हैं। स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक संस्थानों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

आगे की जांच पर टिकी नजर

61 किलो गांजा की यह बरामदगी केवल एक तस्करी प्रयास को नाकाम करने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे बड़े नेटवर्क की ओर भी संकेत करती है। जांच एजेंसियों की कोशिश होगी कि सप्लाई चेन के सभी लोगों की पहचान कर पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाए।

यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में कई अन्य गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। फिलहाल तीनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है।

निष्कर्ष

रांची रेलवे स्टेशन पर 61 किलो गांजा की बरामदगी और तीन तस्करों की गिरफ्तारी झारखंड में नशा तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। आरपीएफ और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार को झटका लगा है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और नशे की यह खेप किन लोगों तक पहुंचाई जानी थी। आने वाले दिनों में जांच से और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

Manish Singh Chandel
Manish Singh Chandelhttps://bhaiyajiinews.in
मनीष सिंह चन्देल रांची और झारखंड से जुड़ी खबरों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग करने वाले एक अनुभवी पत्रकार हैं। वे Bhaiyajii News में मुख्य संवाददाता (Chief Reporter) के रूप में कार्यरत हैं और राज्य से जुड़े प्रशासनिक, सामाजिक, शैक्षणिक, रोजगार, कानून व्यवस्था और जनहित के मुद्दों पर नियमित रूप से तथ्यात्मक और ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं। स्थानीय खबरों की गहरी समझ और तेज़ रिपोर्टिंग के लिए जाने जाने वाले मनीष सिंह चंदेल रांची एवं झारखंड के विभिन्न इलाकों से सामने आने वाली घटनाओं, सरकारी फैसलों और नागरिक समस्याओं को प्राथमिकता के साथ कवर करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग का उद्देश्य आम जनता तक सटीक, निष्पक्ष और भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना है। बतौर मुख्य संवाददाता, वे ब्रेकिंग न्यूज़, फॉलो-अप रिपोर्ट, व्याख्यात्मक लेख (Explainables) और जनहित से जुड़ी विशेष रिपोर्ट्स पर काम करते हैं। प्रशासनिक सूत्रों, स्थानीय अधिकारियों और ज़मीनी स्तर की जानकारी के आधार पर तैयार की गई उनकी खबरें पाठकों के बीच विश्वसनीयता के लिए जानी जाती हैं। Manish Singh Chandel मानते हैं कि स्थानीय पत्रकारिता लोकतंत्र की सबसे मजबूत कड़ी होती है। इसी सोच के साथ वे रांची और झारखंड के नागरिक मुद्दों, विकास कार्यों, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी सूचनाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं, ताकि हर वर्ग तक खबर की सही जानकारी पहुँच सके। Bhaiyajii News के साथ उनकी भूमिका सिर्फ खबरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संपादकीय मानकों, तथ्य-जांच और समयबद्ध रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
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