असम चुनाव : असम विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर हैं। इसी क्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने असम के सरूपथर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यह जनसभा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रत्याशी साहिल मुंडा के समर्थन में आयोजित की गई थी।
जनसभा में उमड़ी भीड़ ने यह संकेत दे दिया कि इस बार सरूपथर की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है। मंच से मुख्यमंत्री ने न केवल अपने प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन मांगा, बल्कि विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला।
“असम की माटी और झारखंड का जज्बा” – सोरेन का बड़ा संदेश
अपने संबोधन में हेमन्त सोरेन ने कहा कि साहिल मुंडा असम और झारखंड के सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा:
“साहिल मुंडा असम की माटी और झारखंड के जज्बे का संगम हैं। इन्हें चुनना मतलब अपने हक और अधिकार को चुनना है।”
उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस चुनाव को केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया न मानें, बल्कि इसे अपने अधिकारों और पहचान की लड़ाई के रूप में देखें।
सामाजिक परिवर्तन का चेहरा: साहिल मुंडा
मुख्यमंत्री ने साहिल मुंडा को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया, जो केवल चुनाव जीतने के लिए राजनीति में नहीं आए हैं, बल्कि समाज में व्यापक बदलाव लाने के उद्देश्य से आगे बढ़े हैं।
उन्होंने कहा कि साहिल मुंडा वंचित और आदिवासी समाज की आवाज हैं। उनका लक्ष्य केवल विधायक बनना नहीं, बल्कि उन लोगों तक विकास और न्याय पहुंचाना है, जो अब तक मुख्यधारा से दूर रहे हैं।
यह बयान JMM की उस रणनीति को दर्शाता है, जिसमें पार्टी सामाजिक न्याय और स्थानीय अधिकारों को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रही है।
स्थानीय अधिकारों और अस्मिता की लड़ाई
हेमन्त सोरेन ने अपने भाषण में स्थानीय अधिकारों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि असम के इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए मजबूत नेतृत्व की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि साहिल मुंडा ने हमेशा जनता के हितों के लिए संघर्ष किया है और अब समय आ गया है कि उन्हें विधानसभा में भेजा जाए, ताकि उनकी आवाज और मजबूत हो सके।
युवाओं को नेतृत्व में लाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि JMM केवल वोट मांगने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि युवाओं को नेतृत्व देने का मंच है।उन्होंने कहा कि साहिल मुंडा के नेतृत्व में संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत हो रहा है और युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे राजनीति में सक्रिय भागीदारी करें और अपने क्षेत्र के विकास में योगदान दें।
शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास का वादा
हेमन्त सोरेन ने कहा कि अगर JMM को सरूपथर में समर्थन मिलता है, तो क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े सुधार किए जाएंगे।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि:
- बेहतर स्कूल और कॉलेज की व्यवस्था की जाएगी
- स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा
- स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे
उन्होंने कहा कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचना चाहिए।
विपक्ष पर हमला, बदले की राजनीति का आरोप
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल सत्ता के लिए राजनीति करता है, जबकि JMM जनता के अधिकारों और विकास के लिए काम करती है।उन्होंने कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि कौन उनके साथ खड़ा है और कौन सिर्फ वादे करता है।
असम में JMM की रणनीति और विस्तार
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, असम में JMM की सक्रियता पार्टी के विस्तार की रणनीति का हिस्सा है।पार्टी आदिवासी और श्रमिक वर्ग को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ रही है, जिससे उसे नए क्षेत्रों में समर्थन मिलने की उम्मीद है।सरूपथर जैसे क्षेत्रों में JMM की पकड़ मजबूत करने की कोशिश इस बात का संकेत है कि पार्टी अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
जनसभा में दिखा उत्साह, चुनावी समीकरण बदलने के संकेत
जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ और लोगों का उत्साह यह दर्शाता है कि इस बार चुनावी मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह समर्थन वोट में तब्दील होता है, तो सरूपथर सीट पर बड़ा उलटफेर हो सकता है।
निष्कर्ष: क्या सरूपथर से शुरू होगा बदलाव?
असम विधानसभा चुनाव 2026 में सरूपथर सीट पर JMM की सक्रियता और हेमन्त सोरेन की रैली ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या साहिल मुंडा इस समर्थन को जीत में बदल पाते हैं या नहीं।
एक बात तय है—यह चुनाव केवल एक सीट का नहीं, बल्कि विचारधारा, पहचान और अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।




