बोकारो में रंगदारी का खेल बेनकाब! किसके नाम पर डराकर वसूले जा रहे थे पैसे? | Jharkhand News | Bhaiyajii News

Bokaro Extortion Case | Jharkhand News | Bhaiyajii News

Bokaro Extortion Case : झारखंड के बोकारो जिले में पिछले कुछ दिनों से व्यापारियों और कारोबारी वर्ग के बीच दहशत का माहौल बना हुआ था। विभिन्न मोबाइल नंबरों से कॉल और मैसेज के जरिए रंगदारी की मांग की जा रही थी। अपराधी खुद को कुख्यात गिरोह से जुड़ा बताकर धमकी देते थे और पैसे नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देते थे।इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।

SIT टीम का गठन और त्वरित कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। यह टीम नगर पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में बनाई गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य रंगदारी गिरोह का खुलासा करना और इसमें शामिल अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना था।

SIT ने लगातार तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर छापेमारी अभियान चलाया। इसके परिणामस्वरूप पुलिस ने कुल 7 अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया, जो इस पूरे नेटवर्क में सक्रिय थे।

कुख्यात गिरोह से जुड़ा था मामला

पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला अमन साहू (मृत), राहुल दुबे और मयंक सिंह गिरोह के नाम का भय दिखाकर अंजाम दिया जा रहा था। अपराधी इन गिरोहों के नाम का इस्तेमाल कर व्यापारियों को डराते थे और उनसे पैसे वसूलने की कोशिश करते थे।

यह भी सामने आया कि अपराधी अलग-अलग नंबरों से कॉल और मैसेज भेजते थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता था।

मुख्य सरगना और गिरोह की कार्यप्रणाली

गिरफ्तार अपराधियों में प्रिंस कुमार गुप्ता उर्फ भटिया को इस गिरोह का मुख्य सरगना बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, वह बोकारो जिले में सक्रिय कई आपराधिक मामलों में पहले से शामिल रहा है और उसके खिलाफ विभिन्न थानों में करीब 10 केस दर्ज हैं।प्रिंस गुप्ता अपने साथियों के जरिए व्यापारियों के मोबाइल नंबर जुटाता था और फिर उन्हें कॉल कर रंगदारी की मांग करता था। इसके अलावा वह अपने नेटवर्क को लगातार विस्तार देने में लगा हुआ था।

गिरफ्तारी के दौरान फायरिंग, आरोपी घायल

पुलिस द्वारा जब प्रिंस गुप्ता की निशानदेही पर हथियार बरामदगी की कार्रवाई की जा रही थी, उसी दौरान अचानक आरोपी द्वारा पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी गई। इस फायरिंग में आरोपी घायल हो गया।

यह घटना इस बात को दर्शाती है कि गिरोह के सदस्य कितने खतरनाक और आक्रामक थे, जो गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस पर हमला करने से भी नहीं हिचकिचा रहे थे।

हथियार, मोबाइल और अन्य सामान की बरामदगी

पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों के पास से कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए हैं। इसमें देसी कट्टा, पिस्टल, जिंदा गोलियां, कार्बाइन मैगजीन, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और स्कूटी शामिल हैं।

बरामद सामान यह दर्शाता है कि गिरोह पूरी तरह से संगठित और हथियारों से लैस था। इसके अलावा रंगदारी मांगने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल और सिम कार्ड भी जब्त किए गए हैं।

गिरफ्तार अपराधियों की पहचान

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अपराधियों में प्रिंस कुमार गुप्ता उर्फ भटिया, श्याम कुमार सिंह, अजय सिंह, ओम प्रकाश पॉल, जयनेंद्र शुक्ला, गोलू कुमार और भूपेंद्र सिंह शामिल हैं।

ये सभी आरोपी बोकारो जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों के निवासी हैं और लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।

अपराधिक इतिहास भी आया सामने

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरफ्तार कई आरोपियों का आपराधिक इतिहास रहा है। कुछ आरोपियों के खिलाफ पहले से कई केस दर्ज हैं, जो यह साबित करता है कि यह कोई नया गिरोह नहीं बल्कि पहले से सक्रिय अपराधी नेटवर्क है।इससे यह भी स्पष्ट होता है कि गिरोह ने लंबे समय से इलाके में अपनी पकड़ बना रखी थी।

पुलिस की रणनीति और तकनीकी जांच

इस मामले को सुलझाने में पुलिस ने तकनीकी जांच का भी सहारा लिया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई।इसके अलावा मुखबिर तंत्र की मदद से भी पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके आधार पर छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

व्यापारियों को राहत, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

इस कार्रवाई के बाद बोकारो के व्यापारियों और कारोबारी वर्ग ने राहत की सांस ली है। लगातार मिल रही धमकियों से लोग भयभीत थे, लेकिन अब पुलिस की इस कार्रवाई के बाद माहौल सामान्य होने की उम्मीद है।पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने का आश्वासन दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

निष्कर्ष: संगठित अपराध पर बड़ा प्रहार

बोकारो में रंगदारी गिरोह के खिलाफ पुलिस की यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश देती है कि संगठित अपराध को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।SIT की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई से न केवल गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है।आने वाले समय में इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी रहेगी और संभव है कि इस नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे सामने आएं।

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