देवघर में साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़: 5 आरोपी गिरफ्तार, ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा | Jharkhand News | Bhaiyajii News

देवघर साइबर फ्रॉड | Jharkhand News | Bhaiyajii News

देवघर साइबर फ्रॉड : झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिले में सक्रिय एक संगठित साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह लंबे समय से लोगों को ऑनलाइन ठगी का शिकार बना रहा था और विभिन्न तरीकों से बैंक खातों से पैसे उड़ाने का काम करता था।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। ये खुद को बैंक अधिकारी, कस्टमर केयर एजेंट या सरकारी योजना के प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते थे और फिर उनके बैंकिंग डिटेल्स हासिल कर लेते थे। इसके बाद ये आरोपी कुछ ही मिनटों में पीड़ितों के खातों से पैसे निकाल लेते थे।

गुप्त सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई

पुलिस को इस गैंग के बारे में गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ युवक देवघर के एक इलाके में बैठकर साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और मौके से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई अहम सबूत भी बरामद किए हैं। इनमें मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण शामिल हैं। इन सभी सामानों का इस्तेमाल साइबर ठगी को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।

ऐसे करते थे लोगों को ठगी का शिकार

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद योजनाबद्ध तरीके से काम करता था। आरोपी इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल नंबर जुटाते थे और फिर उन्हें कॉल कर विभिन्न बहानों से फंसाते थे।

गिरोह के सदस्य खुद को Flipkart, Amazon, Airtel Payment Bank या PhonePe जैसी कंपनियों का अधिकारी बताकर लोगों को भ्रमित करते थे। इसके अलावा, ये लोग गूगल पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर भी अपलोड कर देते थे, ताकि कोई व्यक्ति मदद के लिए कॉल करे तो सीधे इनके जाल में फंस जाए।

इतना ही नहीं, आरोपी लोगों को कैशबैक ऑफर, कार्ड ब्लॉक होने या केवाईसी अपडेट जैसे बहानों से डराकर या लालच देकर उनकी निजी जानकारी हासिल कर लेते थे।

फर्जी लिंक और ऐप के जरिए ठगी

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी फर्जी लिंक और ऐप के जरिए भी लोगों को ठगते थे। ये लोग पीएम किसान योजना, बैंक लोन, क्रेडिट कार्ड और अन्य योजनाओं के नाम पर लिंक भेजते थे।

जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता, उसकी निजी जानकारी हैक कर ली जाती थी। इसके बाद आरोपी बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर कर लेते थे। कई मामलों में ये आरोपी लोगों को PhonePe या Paytm गिफ्ट कार्ड बनाने के लिए भी कहते थे, जिसे तुरंत भुना लिया जाता था।

बरामद हुए मोबाइल और सिम कार्ड

पुलिस ने आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड जब्त किए हैं। इन उपकरणों की मदद से आरोपी अलग-अलग पहचान बनाकर ठगी को अंजाम देते थे। पुलिस अब इन डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है, जिससे इस गैंग के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क केवल देवघर तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके तार अन्य जिलों और राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं।

बड़े नेटवर्क की आशंका

साइबर अपराध के मामलों में झारखंड, खासकर संथाल परगना क्षेत्र, लंबे समय से चर्चा में रहा है। देवघर और जामताड़ा जैसे इलाकों में सक्रिय साइबर अपराधी देशभर के लोगों को निशाना बनाते रहे हैं।

इस मामले में भी पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तार आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। पुलिस अब इनके बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है ताकि पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।

पुलिस की सख्त चेतावनी

देवघर पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठग अब नए-नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। अगर किसी के साथ ठगी होती है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे मामले

झारखंड में साइबर अपराध के कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले भी देवघर और गिरिडीह जिलों में कई साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी कॉल और ऐप के जरिए लोगों से ठगी करते थे। इन मामलों से साफ है कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क लगातार सक्रिय है और पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

निष्कर्ष

देवघर में साइबर फ्रॉड गैंग का भंडाफोड़ पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। हालांकि, यह केवल एक गिरोह का पर्दाफाश है, जबकि ऐसे कई गिरोह अभी भी सक्रिय हो सकते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण हो गई है। लोगों को सतर्क रहने और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि ऐसे अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।

Share it :

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News